हिमाचल प्रदेश के शिलाई विधानसभा क्षेत्र की कोटी-बौंच पंचायत में आयोजित बैशाखी मेले के समापन समारोह में उद्योग, संसदीय मामले एवं श्रम रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे और मेले के समापन को उत्साहपूर्वक मनाया गया।
संस्कृति और परंपरा का प्रतीक मेला
जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि कोटी-बौंच बैशाखी मेला क्षेत्र के आराध्य देव शिरगुल महाराज के नाम पर आयोजित किया जाता है। यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सौहार्द और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। मेलों और त्योहारों के माध्यम से हमारी संस्कृति और परंपराएं जीवित रहती हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
खेल प्रतिभाओं को मिला मंच
मंत्री ने बताया कि मेले के दौरान विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।

वित्तीय चुनौतियों का जिक्र
अपने संबोधन में हर्षवर्धन चौहान ने राज्य के सामने आ रही वित्तीय चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की कटौती की गई है, जिससे प्रदेश के विकास पर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद उन्होंने भरोसा जताया कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है और प्रदेश जल्द ही एक मॉडल स्टेट के रूप में उभरेगा।
किसानों और पशुपालकों के लिए राहत
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, दूध के परिवहन के लिए सहायता राशि को तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जिससे दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। गेहूं और जौ के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का के लिए 50 रुपये प्रति किलोग्राम और हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम MSP तय किया गया है। इसके साथ ही अदरक को पहली बार MSP के दायरे में शामिल करते हुए 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर निर्धारित की गई है। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

विकास कार्यों की घोषणाएं
इस अवसर पर मंत्री ने कोटी गांव में सांझा प्रांगण के लिए तीन लाख रुपये और बालधार मंच के लिए दो लाख रुपये की घोषणा भी की।
जनसमस्याओं का समाधान
कार्यक्रम से पूर्व मंत्री ने लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह रोहनाट में क्षेत्रवासियों की समस्याएं भी सुनीं। लोगों ने अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक समस्याएं उनके समक्ष रखीं। मंत्री ने अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया, जबकि शेष मामलों को संबंधित अधिकारियों को सौंपकर उनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।