हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले ने सर्विकल कैंसर की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे एचपीवी टीकाकरण अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिला इस अभियान में लगातार प्रदेश में पहले स्थान पर बना हुआ है, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले ने एचपीवी टीकाकरण में एक हजार का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर कार्यप्रणाली और जनजागरूकता का परिणाम है।
2899 का लक्ष्य, 1006 लड़कियों का टीकाकरण
उन्होंने बताया कि जिले के 32 अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की कुल 2899 लड़कियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक इन केंद्रों में 1006 लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा चुकी है, जिससे जिला ने 34.7 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। यह आंकड़ा न केवल जिले की सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अभिभावक और किशोरियां इस टीकाकरण के प्रति जागरूक हो रही हैं।
विभिन्न स्वास्थ्य खंडों में प्रगति
जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य खंडों में टीकाकरण की स्थिति भी उत्साहजनक है।
- बड़सर: 201
- भोरंज: 194
- गलोड़: 172
- नादौन: 124
- टौणी देवी: 155
- सुजानपुर: 111
- मेडिकल कॉलेज अस्पताल हमीरपुर: 49
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में अभियान को प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है।
नाल्टी बना उदाहरण
विशेष रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नाल्टी ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक मिसाल कायम की है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए वहां की डॉक्टर पूजा कौंडल को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।
क्या है एचपीवी और इसका महत्व
एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस एक ऐसा वायरस है, जो सर्विकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) का मुख्य कारण माना जाता है। सर्विकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, जिसे समय रहते टीकाकरण के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 14-15 वर्ष की आयु में यह टीका लगवाना सबसे प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इस उम्र में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया करती है।
अब किसी भी दिन लगवा सकते हैं टीका
डॉ. प्रवीण चौधरी ने बताया कि अब 14-15 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियां किसी भी दिन अपने नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर एचपीवी का टीका लगवा सकती हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को इस टीकाकरण के लिए प्रेरित करें, ताकि भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सके।
जनजागरूकता का सकारात्मक असर
जिले में चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों को इस टीके के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके परिणामस्वरूप अब अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं और अपनी बेटियों का टीकाकरण करवा रहे हैं।