जिला बिलासपुर में प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने के साथ ही किसानों में उत्साह का माहौल है। प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किए जाने से किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) परियोजना के माध्यम से शुरू की गई इस पहल को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जिले के किसानों का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि प्राकृतिक खेती अपनाने के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हुआ है। बढ़े हुए समर्थन मूल्य के चलते अब अधिक किसान रसायनमुक्त खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
तीन वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे किसान को मिला लाभ
ग्राम पंचायत कोटला के गांव बनवाड़ निवासी किसान सुमन कुमार ठाकुर ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने लगभग 10 क्विंटल गेहूं आत्मा परियोजना के माध्यम से बेचा है, जिसकी खरीद सरकार ने 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की है।
उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और प्राकृतिक खेती के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ा है।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, गुणवत्ता में हुआ सुधार
ग्राम पंचायत नम्होल के गांव दगशेच निवासी किसान देश राज ने बताया कि आत्मा परियोजना के प्रशिक्षण से प्रेरित होकर उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाई। उनके अनुसार रासायनिक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी, जबकि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद भूमि की उर्वरता में सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक तरीके से उत्पादित गेहूं का स्वाद और गुणवत्ता भी पहले की तुलना में बेहतर है। किसानों ने मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समर्थन मूल्य में लगातार वृद्धि से खेती लाभकारी बन रही है।
223 किसान तैयार, लक्ष्य के करीब पहुंची खरीद
परियोजना निदेशक आत्मा रितेश गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष जिला बिलासपुर में प्राकृतिक खेती से उत्पादित 175 क्विंटल गेहूं खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक लगभग 120 किसानों से करीब 160 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जिले में केवल 40 किसानों से लगभग 60 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस वर्ष खरीद का दायरा लगभग तीन गुना बढ़ गया है। जिले में 223 किसानों ने प्राकृतिक गेहूं बेचने के लिए सहमति दी है और शीघ्र ही निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए खरीद केंद्र
किसानों की सुविधा के लिए बिलासपुर शहर के निहाल स्थित सिविल सप्लाई गोदाम तथा पट्टा में खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। सदर और स्वारघाट विकास खंड के किसान निहाल केंद्र पर जबकि झंडूता और घुमारवीं क्षेत्र के किसान पट्टा केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं।
इन केंद्रों पर केवल वही किसान गेहूं बेच सकते हैं जो आत्मा परियोजना द्वारा प्रमाणित हों, हिम परिवार पोर्टल पर पंजीकृत हों तथा प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादन कर रहे हों।
जिले में 8 हजार किसान जुड़े प्राकृतिक खेती से
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि जिला बिलासपुर में आत्मा परियोजना के माध्यम से लगभग 8 हजार किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और करीब 1,094 हेक्टेयर भूमि को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है ताकि किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ रसायनमुक्त खाद्यान्न उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिल सके।
सरकार की यह पहल न केवल किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दे रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी मजबूती प्रदान कर रही है।