हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा की गई इंडो–यूएस ट्रेड डील को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में शिमला स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के नेताओं ने इस समझौते को देश की अर्थव्यवस्था, कृषि क्षेत्र और छोटे उद्योगों के लिए नुकसानदायक बताया। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए छत्तर सिंह ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा की गई यह ट्रेड डील कई सवाल खड़े करती है और इसके दूरगामी प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं।
ट्रेड डील की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
छत्तर सिंह ठाकुर ने कहा कि हाल ही में कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी के नाम कथित तौर पर एप्सटीन फाइल से जुड़े होने की चर्चाएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के बाद ही केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ यह ट्रेड डील की है, जिससे इस समझौते की पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े होते हैं।
किसानों और उद्योगों पर पड़ सकता है असर
युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस समझौते के कई नकारात्मक प्रभाव देश के कृषि क्षेत्र पर पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में खुली पहुंच मिलती है तो भारतीय किसानों को अपने उत्पाद कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसके अलावा देश के लघु और सूक्ष्म उद्योगों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियों के भारत में आने से छोटे उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा और कई उद्योग बंद होने की स्थिति में भी आ सकते हैं।
टैरिफ असमानता का आरोप
इस अवसर पर शुभ्रा जिंटा ने कहा कि इस ट्रेड डील के तहत भारत को अपने उत्पादों पर लगभग 18 प्रतिशत टैरिफ देना पड़ेगा, जबकि अमेरिकी उत्पादों को भारत में शून्य टैरिफ के साथ भेजने की अनुमति होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता पूरी तरह से एकतरफा है और इससे अमेरिका के व्यापार को लाभ होगा, जबकि भारत के उद्योग और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
डेटा सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव डॉ. रणजीत वर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश के 140 करोड़ लोगों का डेटा अमेरिका के साथ साझा किए जाने की बात सामने आई है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की निजता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश कभी भी अपना डेटा इस प्रकार साझा नहीं करते, लेकिन भारत सरकार ने इस मामले में देशहित की अनदेखी की है।
तेल खरीद को लेकर भी उठाए सवाल
डॉ. रणजीत वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि इस समझौते के बाद केंद्र सरकार ने रूस और ईरान से सस्ते दामों पर तेल लेने के बजाय अमेरिका से अधिक कीमत पर तेल खरीदना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
संसद घेराव की चेतावनी
प्रेस वार्ता के दौरान छत्तर सिंह ठाकुर ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर भारतीय युवा कांग्रेस पहले भी विरोध प्रदर्शन कर चुकी है उन्होंने बताया कि इस विषय को लेकर 16 मार्च को दिल्ली में संसद घेराव और विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था, किसानों और छोटे उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए किया जाएगा।
डील रद्द करने की मांग
प्रेस वार्ता के अंत में हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस इंडो–यूएस ट्रेड डील को जल्द से जल्द रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता जारी रहता है तो इससे देश के किसानों, छोटे उद्योगों और अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है। युवा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देशहित को ध्यान में रखते हुए इस डील की पुनः समीक्षा की जानी चाहिए।