स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात लेखक और प्रगतिशील साहित्य के प्रमुख स्तंभ यशपाल की जयंती के उपलक्ष्य में भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा शनिवार को यशपाल साहित्य प्रतिष्ठान हमीरपुर में एक साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया। जिले भर से आए साहित्यकारों, कवियों, लेखकों और साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
एडीसी अभिषेक गर्ग ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ एडीसी हमीरपुर अभिषेक गर्ग ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। उन्होंने कहा कि यशपाल का लेखन सामाजिक न्याय, समानता और मानवता का सार है और आज भी समाज को दिशा प्रदान करता है। उन्होंने युवाओं को साहित्य से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।
लेखक गोष्ठी में रखे गए शोध लेख और विचार
पहले सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार ओपी शर्मा ने की। इस लेखक गोष्ठी में—
• ओपी शर्मा
• राजेंद्र राजन
• राम चंद रत्नाकर
ने यशपाल के जीवन, साहित्यिक योगदान और उनके सामाजिक दृष्टिकोण पर अपने शोध लेख प्रस्तुत किए। अन्य साहित्यकारों ने भी परिचर्चा में भाग लेकर यशपाल साहित्य की प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।
कवि सम्मेलन में गूँजी रचनाएँ
दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में जिले के प्रमुख कवियों—
लाल चंद ठाकुर, राम चंद शास्त्री, होशियार सिंह, दलीप सिंह, देशराज कमल, डॉ. सुशीला गौतम, केहर सिंह, डॉ. पिंकी शर्मा, नीरज पखरोलवी, संतोष कुमारी और सोनिका पखरोलवी
—ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं।
‘किताब घर’ का अवलोकन
एडीसी अभिषेक गर्ग ने यशपाल साहित्य प्रतिष्ठान में स्थापित किताब घर का अवलोकन भी किया, जहाँ हिमाचल प्रदेश के साहित्यकारों की पुस्तकें और पत्रिकाएँ अध्ययन, शोध और बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
यशपाल की साहित्यिक विरासत को समर्पित आयोजन
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यशपाल का साहित्य आज भी—
• समानता
• स्वतंत्रता
• सामाजिक चेतना
की लौ जलाए हुए है और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
