हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कानून व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान देखने को मिला, जब विपिन सिंह परमार ने पुलिस एवं संबंधित संगठनों की मांग संख्या 7 पर चर्चा के दौरान सरकार को घेरा और प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि सदन में हत्या, लूट, नशा और अन्य अपराधों पर तो चर्चा होती है, लेकिन कई बड़े और संगठित अपराध ऐसे हैं जो कुछ समय तक मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद फाइलों में दबा दिए जाते हैं।
⚠️ पालमपुर भूमि घोटाले पर बड़ा आरोप
परमार ने पालमपुर के बनूरी क्षेत्र में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित भूमि घोटाले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लगभग 80 वर्ष पुरानी पुश्तैनी जमीन को फर्जी दस्तावेजों और नकली कानूनी वारिसों के जरिए हड़प लिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कुछ प्रॉपर्टी डीलरों की मिलीभगत रही है।
परमार ने कहा कि जिस महिला के नाम पर जमीन दर्शाई गई, वह कभी उस क्षेत्र की निवासी ही नहीं थी, बावजूद इसके फर्जी एफिडेविट और गवाहियों के आधार पर उसका मृत्यु प्रमाण पत्र तक जारी कर दिया गया। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि अब तक एफआईआर दर्ज न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
🏗️ CLU मामलों में नियमों की अनदेखी
परमार ने “हिमाचल ऑन सेल” का मुद्दा उठाते हुए चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) के मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में सैकड़ों मामलों में बिना सरकार की मंजूरी के भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति दी गई, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
उनके अनुसार यह स्थिति प्रदेश के नियोजन तंत्र और पर्यावरणीय संतुलन दोनों के लिए खतरा है।
🚫 माफिया गतिविधियों पर गंभीर चिंता
विपिन परमार ने कहा कि प्रदेश में अब खनन माफिया, शराब माफिया और जंगल माफिया सक्रिय हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है और समाज पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने अवैध शराब के कारोबार को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि यह खुलेआम चल रहा है, जबकि कुछ मामलों में पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति नशा मुक्ति के लिए सामाजिक कार्य कर रहा है, तो उसे प्रोत्साहन मिलना चाहिए, न कि प्रताड़ित किया जाना चाहिए।
🌊 सुलह क्षेत्र में अवैध खनन
परमार ने अपने विधानसभा क्षेत्र सुलह में अवैध खनन और जल स्रोतों को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस दिशा में तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
👮♂️ पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने की मांग
उन्होंने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को वीआईपी ड्यूटी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया जाना चाहिए।
परमार ने कहा कि पुलिस का मुख्य दायित्व कानून व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन वर्तमान में उस पर अन्य प्रकार के दबाव डाले जा रहे हैं, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
📢 सरकार के सामने रखी प्रमुख मांगें
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सरकार से निम्नलिखित मांगें रखीं—
- पालमपुर भूमि घोटाले में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए
- CLU मामलों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए
- खनन, शराब और जंगल माफिया पर कड़ी कार्रवाई हो
- पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया जाए
🔍 प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल
अंत में विपिन सिंह परमार ने कहा कि यदि इन मामलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रदेश की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती बन जाएगा।
उन्होंने सरकार से अपील की कि इन मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए।