भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन परमार ने ₹54,928 करोड़ के हिमाचल प्रदेश बजट 2026 पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे आर्थिक कुप्रबंधन, कर्ज और कटौती का दस्तावेज करार दिया है।
बजट में कटौती पर सवाल
विपिन परमार ने कहा कि:
- पिछले वर्ष का बजट ₹58,514 करोड़ था
- इस बार ₹3,586 करोड़ की कटौती की गई
उन्होंने इसे सरकार की कमजोर आर्थिक स्थिति का संकेत बताया।
वेतन स्थगन पर कड़ा विरोध
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- कर्मचारियों के वेतन का हिस्सा 6 महीने के लिए स्थगित किया गया
- ग्रुप-ए और ग्रुप-बी अधिकारियों के वेतन का 3% हिस्सा भी रोका गया
उन्होंने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ने वाला है।
आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा
परमार ने कहा कि:
- आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ₹13,750 न्यूनतम वेतन तय करना अपर्याप्त है
- उन्हें न नौकरी की सुरक्षा है, न स्थायी सुविधाएं
उन्होंने इसे लंबे समय से जारी शोषण बताया।
“मानदेय बढ़ोतरी केवल दिखावा”
उन्होंने कहा कि:
- आंगनबाड़ी, आशा वर्कर आदि के लिए ₹500–₹1000 बढ़ोतरी
- केवल दिखावटी कदम हैं
इनसे महंगाई का असर कम नहीं होगा और वास्तविक समस्याएं हल नहीं होंगी।
बढ़ते कर्ज पर चिंता
विपिन परमार ने कहा कि:
- सरकार पर लगभग ₹13,000 करोड़ की देनदारियां हैं
- प्रदेश पहले ही ₹45,000 करोड़ से अधिक कर्ज में डूबा है
सरकार से सीधे सवाल
उन्होंने सरकार से पूछा:
- क्या वेतन स्थगन ही वित्तीय सुधार है?
- क्या आउटसोर्स कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित है?
- क्या सरकार अपनी नीतिगत विफलता स्वीकार करेगी?
प्रमुख मांगें
उन्होंने मांग की कि:
- वेतन स्थगन का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए
- आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति बनाई जाए
- कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए
निष्कर्ष
विपिन परमार ने बजट को लेकर कहा कि यह:
- विकास नहीं, बल्कि आर्थिक संकट का संकेत है
- कर्मचारियों और आम जनता पर बोझ डालने वाला दस्तावेज है