वीर बाल दिवस पर साहिबजादों को नमन: कश्यप

rakesh nandan

27/12/2025

धर्म एवं संस्कृति की रक्षा हेतु अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान दिवस वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष केशव चौहान ने की, जबकि कार्यक्रम संयोजक परमजीत चड्ढा रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुरेश कश्यप ने कहा कि वीर साहिबजादों और गुरु गोबिंद सिंह जी का स्मरण करते हुए मन शोक से भर जाता है, लेकिन साथ ही गर्व की अनुभूति भी होती है। बहुत कम आयु में अत्यंत क्रूर यातनाएं सहकर भी साहिबजादों ने धर्म के सामने सिर नहीं झुकाया। उन्होंने माता गुजरी के त्याग, धैर्य और संस्कारों को नमन करते हुए कहा कि बाबा जोरावर सिंह मात्र 9 वर्ष और बाबा फतेह सिंह मात्र 7 वर्ष की आयु में लोभ, भय और दबाव के बावजूद अपने धर्म से विचलित नहीं हुए। यह माता गुजरी द्वारा दिए गए संस्कारों का ही परिणाम था।

सुरेश कश्यप ने कहा कि विश्व इतिहास में यह दुर्लभ उदाहरण है, जहां किसी पिता ने धर्म की रक्षा के लिए स्वयं, अपनी माता और अपने चारों पुत्रों का बलिदान दिया हो। इसी कारण गुरु गोबिंद सिंह जी को “सरबंस दानी” कहा जाता है, जो जनता द्वारा दिया गया सर्वोच्च सम्मान है। उन्होंने गुरु तेग बहादुर के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि कश्मीर के पंडितों की रक्षा के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आठ वर्ष की आयु में बालक गोबिंद राय द्वारा अपने पिता से बलिदान देने का आग्रह भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। दिल्ली का सीसगंज गुरुद्वारा आज भी श्रद्धा और बलिदान का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यदि नवम गुरु और दशम पिता न होते तो भारत की धर्म-संस्कृति का अस्तित्व संकट में पड़ जाता। चमकौर साहिब में साहिबजादों को धर्म की रक्षा हेतु हंसते-हंसते बलिदान के लिए भेजना अद्वितीय साहस और समर्पण का उदाहरण है। कार्यक्रम में सुरेश भारद्वाज, कर्ण नंदा, कमलजीत सूद, संजय सूद, संजीव कटवाल, संजीव दृष्टा, रमा ठाकुर, गौरव कश्यप, विजय परमार सहित अनेक वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।