विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर जिला ऊना में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में एक जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और निक्षय वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन जिले में टीबी जागरूकता और संभावित रोगियों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने अपने संबोधन में कहा कि जिला ऊना में क्षय रोग नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत आशा वर्करों के माध्यम से घर-घर जाकर लोगों को टीबी के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संभावित टीबी रोगियों की पहचान कर उनकी एक्स-रे जांच और बलगम के नमूने गांव-गांव में ही निक्षय वाहन के माध्यम से एकत्रित किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि जिला ऊना ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और सभी श्रेणियों में प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग और संबंधित टीमों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जिले में टीबी जांच की दर में भी काफी वृद्धि हुई है। वर्तमान में जिले के पांच अस्पतालों में अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से टीबी की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा रोगियों की शीघ्र पहचान, समयबद्ध उपचार और पोषण सहायता को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे रोगियों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो सके।
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मनकोटिया ने जानकारी देते हुए बताया कि विश्व क्षय रोग दिवस हर वर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य टीबी नियंत्रण की दिशा में हुई प्रगति को याद करना और लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान जिला ऊना में 31,029 संभावित टीबी रोगियों की जांच की गई, जिनमें से 796 रोगियों की पुष्टि हुई। इन सभी रोगियों का उपचार विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से निशुल्क किया जा रहा है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि रोगियों की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. विशाल ठाकुर ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में शीघ्र निदान, पूर्ण उपचार, पोषण सहायता और सामुदायिक भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ‘निक्षय मित्र’ जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से लोग और संस्थाएं टीबी रोगियों को पोषण और मनोसामाजिक सहायता प्रदान कर सकते हैं, जिससे उनके उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते इसका समय पर इलाज किया जाए। इसलिए लोगों को लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेना चाहिए।
इस अवसर पर जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी गोपाल कृष्ण, जिला क्षयरोग एवं एचआईवी कार्यक्रम समन्वयक गुलशन कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक राकेश ठाकुर, वरिष्ठ क्षय रोग लैब निरीक्षक संदीप धीर, अस्पताल स्टाफ और नर्सिंग छात्राएं भी उपस्थित रहीं।
यह कार्यक्रम न केवल टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक माध्यम बना, बल्कि जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हुआ। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से यह अभियान आने वाले समय में और प्रभावी परिणाम दे सकता है।