उपायुक्त जतिन लाल की अध्यक्षता में आज अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा दिव्यांगजनों के संरक्षण से संबंधित दो जिला स्तरीय समितियों की बैठकें आयोजित की गईं। बैठक में उपायुक्त ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम तथा राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई एवं आपसी समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पहली बैठक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत गठित जिला सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की आयोजित की गई। उपायुक्त ने कहा कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य जातिगत भेदभाव को रोकना तथा पीड़ितों को समयबद्ध न्याय एवं राहत प्रदान करना है। उन्होंने अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत मामलों की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने जानकारी दी कि इस अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने पर सजा के साथ-साथ पीड़ितों को एक लाख रुपये से लेकर 8 लाख 25 हजार रुपये तक की पुनर्वास राहत राशि देने का प्रावधान है। यह राशि एफआईआर दर्ज होने, मामला न्यायालय में प्रस्तुत होने तथा निर्णय आने के विभिन्न चरणों में दी जाती है।
दूसरी बैठक राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय स्थानीय समिति की थी, जिसमें ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता एवं बहु-दिव्यांगता से पीड़ित व्यक्तियों के विधिक संरक्षण पर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद ऐसे व्यक्तियों के लिए स्थायी अथवा सीमित अवधि के विधिक संरक्षक नियुक्त किए जाते हैं। 30 दिसंबर, 2025 तक जिले में 113 स्थायी विधिक संरक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं।
उपायुक्त ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे दोनों अधिनियमों के अंतर्गत निर्धारित प्रावधानों का गंभीरता से पालन करें तथा पीड़ितों एवं दिव्यांगजनों को त्वरित राहत और विधिक संरक्षण उपलब्ध करवाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। बैठक में जिला कल्याण अधिकारी आवास पंडित, प्रेम आश्रम ऊना की प्रधानाचार्या सिस्टर संजना, सिस्टर आशा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।