ऊना की निशु सूद बनीं महिला आत्मनिर्भरता की मिसाल

rakesh nandan

23/03/2026

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह (SHG) महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। इसी कड़ी में जिला ऊना के अंबोटा गांव की निशु सूद आज आत्मनिर्भरता और महिला उद्यमिता की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। उन्होंने न केवल खुद आर्थिक रूप से मजबूत बनने का सफर तय किया, बल्कि दर्जनों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनके जीवन में भी बदलाव लाया है।

निशु सूद द्वारा तैयार की गई पारंपरिक चटनियां और अचार आज केवल ऊना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों तक अपनी पहचान बना चुके हैं। उनके उत्पादों को बाजार में लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, जिससे उनका यह प्रयास एक सफल महिला उद्यम के रूप में स्थापित हुआ है।

छोटे प्रयास से बड़ी सफलता

निशु सूद ने ‘गणेश स्वयं सहायता समूह’ के माध्यम से अपने व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआत में केवल 8 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास आज करीब 70 महिलाओं को रोजगार से जोड़ चुका है। समूह द्वारा वर्तमान में लगभग 60 प्रकार की चटनियां और अचार तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें कटहल, सहजन, करेला, नींबू, गाजर, आम, आंवला और जामुन जैसे पारंपरिक स्वाद शामिल हैं।

हर महीने ₹60 हजार तक आय

आज यह उद्यम आर्थिक रूप से भी मजबूत बन चुका है। सभी खर्चों के बाद निशु सूद प्रतिमाह लगभग ₹50,000 से ₹60,000 तक शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। इसके अलावा उन्होंने 5 महिलाओं को स्थायी रोजगार भी प्रदान किया है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

मेलों और बाजारों से मिली पहचान

निशु सूद के उत्पादों की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सरस मेला, श्री चिंतपूर्णी महोत्सव और राज्य स्तरीय हरोली उत्सव जैसे बड़े आयोजनों में स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों की सफल बिक्री की है। इन मेलों में प्रत्येक बार लगभग ₹2 से ₹2.5 लाख तक का कारोबार हुआ है। इसके अलावा उनके उत्पाद अब गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों तक भी पहुंच चुके हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

निशु सूद के उत्कृष्ट कार्यों को कई मंचों पर सराहा गया है। वर्ष 2023 में उन्हें हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उन्हें ₹1 लाख की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया। इसके अलावा कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए कार्यों के लिए उन्हें वर्ष 2021 में ‘गरिमा अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया।

SHG और NRLM से मिला सहयोग

निशु सूद बताती हैं कि उन्हें स्वयं सहायता समूह की जानकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से मिली। वर्ष 2001 में समूह का पंजीकरण हुआ और उन्होंने छोटे स्तर पर काम शुरू किया। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक और तकनीकी सहायता मिली, जिससे उनके व्यवसाय को नई दिशा मिली।

उन्हें ₹35,000 का रिवॉल्विंग फंड मिला, जिससे उन्होंने दाल पिसाई और बड़ियां बनाने की मशीन खरीदी और उत्पादन क्षमता बढ़ाई।

ऑनलाइन और पर्यटन बाजार तक पहुंच

आज निशु सूद अपने उत्पादों को हिमाचल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे शिवबाड़ी गगरेट, शिमला, ततापानी, कुफरी और चंबा में बेच रही हैं। इसके अलावा ऑनलाइन ऑर्डर और कुरियर के माध्यम से वे देशभर में अपने उत्पादों की आपूर्ति कर रही हैं।

महिलाओं के लिए प्रेरणा

निशु सूद का कहना है कि सरकार और प्रशासन से मिले सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की अपील की है।

उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि जिले में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाएं प्रदान कर इन समूहों को सशक्त किया जा रहा है।

अंत में कहा जा सकता है कि निशु सूद की यह सफलता कहानी न केवल महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं और समाज में अपनी पहचान स्थापित कर सकती हैं।