प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय सशक्त करने की दिशा में प्रदेश सरकार के प्रयासों को नया आयाम देते हुए बुधवार को ऊना जिले के रामपुर और टकारला अनाज मंडियों में प्राकृतिक खेती से उत्पादित मक्की की खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई। यह खरीद हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा आत्मा परियोजना ऊना के सहयोग से शुरू की गई है।
मक्की खरीद के पहले दिन जिले के 16 किसानों से लगभग 80 क्विंटल प्राकृतिक मक्की की खरीद की गई। उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि किसानों को उनकी फसल की रसीदें उपलब्ध करवाई गई हैं और भुगतान की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, साथ ही इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और लागत लगभग शून्य होने से किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
समर्थन मूल्य—किसानों के लिए बड़ी राहत
आत्मा परियोजना निदेशक प्यारो देवी ने बताया:
प्राकृतिक खेती से उत्पादित मक्की का समर्थन मूल्य 40 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है।
अतिरिक्त 2 रुपये प्रति किलोग्राम भाड़ा, अर्थात कुल 42 रुपये प्रति किलोग्राम किसानों को प्राप्त होंगे।
किसान अपनी मक्की को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके एक सप्ताह के भीतर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रामपुर और टकारला गोदामों में विक्रय कर सकते हैं।
किसान बोले—सरकार की पहल लाभकारी
सासन के किसान ओंकार ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से किसानों की कमाई बढ़ी है और अब उन्हें उचित दाम मिल रहे हैं।
बीनेवाल के गुरदीप सिंह, बरनोह के दौलत राम, और हरोली की पूनम ने बताया कि पहले रासायनिक खाद से तैयार मक्की केवल 23 रुपये प्रति किलो बिकती थी, जबकि प्राकृतिक खेती वाली मक्की 40–42 रुपये प्रति किलो बिक रही है—जो किसानों के लिए बड़ा आर्थिक लाभ है।
उपस्थित अधिकारी
इस अवसर पर परियोजना निदेशक प्यारो देवी, नागरिक आपूर्ति निगम की क्षेत्रीय प्रबंधक रीटा, तथा अन्य अधिकारी मौजूद रहे।