मानसून-2026 को लेकर ऊना प्रशासन सतर्क, आपदा प्रबंधन तैयारियां तेज
दक्षिण-पश्चिम मानसून-2026 के आगमन से पहले ऊना जिला प्रशासन ने संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बाढ़, जलभराव, भूस्खलन और अन्य आपात परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से प्रशासन विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन तंत्र को भी सुदृढ़ बना रहा है।
अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि मानसून सीजन के दौरान जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा
अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर आगामी मानसून सीजन की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव केके पंत की अध्यक्षता में शिमला से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में मानसून से पहले की तैयारियों, आपदा प्रबंधन योजनाओं और राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान सभी जिलों को संभावित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने और पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
विभागों को जारी किए गए दिशा-निर्देश
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि मानसून सीजन को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्व चेतावनी प्रणाली को सक्रिय बनाए रखने, मौसम संबंधी सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान तथा आपदा की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए विभागों को तैयार रहने को कहा गया है। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में देरी न हो।
नदियों और नालों की सफाई पर जोर
महेंद्र पाल गुर्जर ने बताया कि संबंधित विभागों को नदियों, खड्डों और नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को कम करने के लिए संभावित अवरोधों को समय रहते हटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसके अलावा पुलों और पुलियों के आसपास जमा मलबे और कचरे को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भारी वर्षा की स्थिति में जल निकासी सुचारू बनी रहे।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर विशेष नजर
जिला प्रशासन ने भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखने के निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को ऐसे क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण करने और आवश्यकतानुसार सुरक्षा उपाय लागू करने के लिए कहा गया है।
प्रशासन का मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से की गई तैयारी किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स का प्रशिक्षण
आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षित स्वयंसेवक आपातकालीन परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन की सहायता करेंगे।
इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करना और आपदा के दौरान प्रभावित लोगों तक जल्द सहायता पहुंचाना है।
आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित
अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि सभी विभागों को आवश्यक उपकरणों, मशीनरी, राहत सामग्री और अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मानसून के दौरान सड़क अवरुद्ध होने, बाढ़ की स्थिति या अन्य आपात परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहना बेहद आवश्यक है। प्रशासन इस दिशा में सभी आवश्यक कदम उठा रहा है।
10 जून को होगी समीक्षा बैठक
महेंद्र पाल गुर्जर ने बताया कि मानसून सीजन-2026 की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा के लिए 10 जून को बचत भवन ऊना में एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।
इस बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए गए पूर्व प्रबंधों, उपलब्ध संसाधनों, राहत एवं बचाव योजनाओं तथा आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों को अपने-अपने विभागों की तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जन-धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन मानसून सीजन के दौरान जन-धन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। सभी विभागों को पूर्ण सतर्कता और तत्परता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
उन्होंने कहा कि समय रहते की गई तैयारियां आपदाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रशासन का प्रयास है कि मानसून के दौरान किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना बेहतर समन्वय और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से किया जा सके।