जिला ऊना में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस संबंध में उपायुक्त जतिन लाल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें गैस वितरण की प्राथमिकताओं और निगरानी व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा की गई।
प्राथमिकता के आधार पर होगी गैस आपूर्ति
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जिले में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का वितरण सरकार द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सबसे पहले शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा होटल-ढाबों, सामाजिक आयोजनों तथा अन्य संस्थानों को उनकी जरूरत और उपलब्धता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि गैस आपूर्ति बुकिंग और पिछले उपभोग के रिकॉर्ड के आधार पर की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
जिला स्तर पर गठित कमेटी
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में एलपीजी वितरण की निगरानी के लिए जिला स्तरीय कमेटियों का गठन किया गया है। इस कमेटी में उपायुक्त अध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और शिक्षा विभाग के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हैं, जबकि जिला नियंत्रक (खाद्य एवं आपूर्ति) सदस्य सचिव के रूप में कार्य करते हैं। इसके अलावा तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी आवश्यकतानुसार शामिल किया गया है।
घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता
उपायुक्त ने बताया कि जिले में घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 8000 घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से की जा रही है। इसके अतिरिक्त जिले में लगभग 7000 पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन भी सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
PNG कनेक्शन बढ़ाने पर जोर
जतिन लाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तेल विपणन कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक लोगों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने से एलपीजी पर दबाव कम होगा और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर बनी रहेगी। साथ ही होटल और ढाबा संचालकों से भी पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की गई।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती
उपायुक्त ने कमेटी के सदस्यों को निर्देश दिए कि बाजार में एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और एलपीजी आपूर्ति विनियमन आदेश के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त निरीक्षण दल गठित
एलपीजी के डायवर्जन, कम वजन और कालाबाजारी को रोकने के लिए जिला स्तर पर संयुक्त निरीक्षण दल भी गठित किए गए हैं। इन टीमों में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, तेल विपणन कंपनियों और हिमाचल प्रदेश पुलिस के अधिकारी शामिल होंगे, जो नियमित जांच करेंगे।
खपत और वितरण के आंकड़े
जिला नियंत्रक राजीव शर्मा ने बताया कि जिले में वर्तमान में 3088 वाणिज्यिक गैस कनेक्शन हैं, जबकि मासिक खपत लगभग 5627 सिलेंडर है।
इनमें से:
785 सिलेंडर शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को
3198 होटल-ढाबों और रेस्तरां को
860 सामाजिक आयोजनों के लिए
203 औषधि उद्योगों को
579 सरकारी और औद्योगिक संस्थानों को आपूर्ति की जाती है
निष्कर्ष
ऊना जिले में एलपीजी गैस की आपूर्ति को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हैं। प्राथमिकता आधारित वितरण, पीएनजी को बढ़ावा और सख्त निगरानी से न केवल गैस की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।