मजदूर परिवार के सपनों को मिला सहारा
बसाल में रहने वाले नरेश कुमार का एक छोटा-सा घर है। छह सदस्यों के इस परिवार की रोजी-रोटी नरेश के रंग-रोगन (पेंटिंग) के काम पर ही निर्भर है। सीमित आय में परिवार का गुजारा करना ही मुश्किल था। करीब 10 से 12 हजार रुपये मासिक आय में घर खर्च चलाने के बाद बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाना नरेश के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। नरेश की बेटी पूजा आगे पढ़ना चाहती थीं और एमए करने का सपना देख रही थीं, जबकि बेटा आईटीआई करना चाहता था। दोनों बच्चों के मन में आगे बढ़ने की इच्छा थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति देखकर वे अपनी जरूरतों को दबा लेते थे। पूजा बताती हैं कि कई बार ऐसा लगा कि पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था।
कामगार कल्याण बोर्ड की सहायता से बदली स्थिति
इसी बीच हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की एक योजना ने इस परिवार की बड़ी चिंता दूर कर दी। बोर्ड से फीस और पढ़ाई से जुड़े खर्चों के लिए 1 लाख 8 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने से बच्चों की पढ़ाई का रास्ता आसान हो गया। नरेश बताते हैं कि वे कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत मजदूर हैं और वहीं से उन्हें इस योजना के बारे में जानकारी मिली। जब उन्हें बच्चों की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता मिली तो परिवार में खुशी का माहौल बन गया और बच्चों के सपनों को नई दिशा मिली।
अब शिक्षा के साथ आगे बढ़ रहे बच्चे
आज परिवार की परिस्थितियां पहले से बेहतर हैं। पूजा अब ऊना के डिग्री कॉलेज से एमए इकोनॉमिक्स कर रही हैं और भविष्य में प्रोफेसर बनने का सपना देख रही हैं। वहीं उनका भाई गगरेट से आईटीआई की पढ़ाई कर रहा है और अपने पैरों पर खड़े होने की तैयारी कर रहा है। नरेश बताते हैं कि अब वे अपनी मां, पत्नी और तीन बच्चों के साथ पहले से ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करते हैं। वे प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि सरकार की इस योजना से उनके बच्चों की पढ़ाई जारी रह सकी है।
कई परिवारों के लिए सहारा बना बोर्ड
यह कहानी केवल नरेश कुमार के परिवार की नहीं है। ऊना जिले में उनके जैसे सैकड़ों मजदूर परिवारों को कामगार कल्याण बोर्ड की योजनाओं से मदद मिल रही है। इन योजनाओं के माध्यम से मजदूरों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सहारा मिल रहा है।
श्रमिकों के लिए कई योजनाएं
कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने बताया कि प्रदेश सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हजारों पंजीकृत निर्माण कामगारों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है।
बोर्ड के माध्यम से श्रमिकों को कई प्रकार की सहायता प्रदान की जाती है, जिनमें शामिल हैं:
शिक्षा सहायता
मातृत्व एवं पितृत्व लाभ
विवाह सहायता
चिकित्सा सहायता
पेंशन योजना
इन योजनाओं का उद्देश्य कामगारों को आर्थिक सुरक्षा देना और उनके परिवारों का जीवन स्तर बेहतर बनाना है।
प्रशासन कर रहा जागरूकता पर जोर
ऊना के उपायुक्त जतिन लाल ने बताया कि जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहा है कि सभी पात्र निर्माण कामगारों तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रशासन जागरूकता और समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी पात्र व्यक्ति इन योजनाओं से वंचित न रहे।
शिक्षा से लेकर पेंशन तक सहायता
जिला श्रमिक कल्याण अधिकारी अमन शर्मा ने बताया कि योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि बोर्ड के तहत:
स्वयं के विवाह और दो बच्चों के विवाह के लिए 51-51 हजार रुपये
चिकित्सा सहायता 50 हजार से 5 लाख रुपये तक
शिक्षा सहायता पहली कक्षा से पीएचडी तक 8400 से 1.20 लाख रुपये तक
60 वर्ष की आयु के बाद 1000 रुपये मासिक पेंशन
इसके अलावा सदस्य की मृत्यु होने पर आश्रितों को 2 से 4 लाख रुपये, अंतिम संस्कार सहायता 20 हजार रुपये, बेटी जन्म उपहार योजना के तहत 51 हजार रुपये, विधवा पेंशन और आवास योजना के तहत भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।