ऊना जिला प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उपायुक्त जतिन लाल ने जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले खाद्य व्यवसाय संचालकों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिला अधिकारियों को खाद्य सैंपलों की संख्या बढ़ाने, अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई करने और खराब गुणवत्ता के खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाने के निर्देश दिए।
शराब विक्रेताओं के लिए खाद्य लाइसेंस अनिवार्य
डीसी ने सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा को राज्य कर एवं आबकारी विभाग के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि
सभी शराब विक्रेता अनिवार्य रूप से खाद्य लाइसेंस प्राप्त करें।
लाइसेंस न लेने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अब तक की कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि:
जिले में 482 फूड लाइसेंस ऑपरेटर सक्रिय हैं।
3985 फूड बिज़नेस ऑपरेटर पंजीकृत हैं।
अप्रैल से 28 नवंबर 2025 तक 144 नए लाइसेंस, जिससे ₹6.92 लाख राजस्व।
1017 पंजीकरण, जिनसे ₹6.03 लाख शुल्क प्राप्त हुआ।
प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध है।
सैंपलिंग रिपोर्ट
वर्ष 2025 में 88 खाद्य नमूने लिए गए।
परीक्षण किए गए 62 नमूनों में से—
14 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
48 नमूने मानक अनुरूप पाए गए।
विभाग ने ₹12.59 लाख का जुर्माना लगाया।
दिवाली अभियान में 1500 किलोग्राम पनीर जब्त किया गया।
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब शुरू
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ऊना को मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब उपलब्ध करवाई है, जिसमें—
दूध, तेल, जूस आदि का तुरंत और नि:शुल्क परीक्षण होगा।
लैब जिला में जागरूकता और निगरानी कार्यों में भी उपयोग होगी।
फूड फोर्टिफिकेशन और तेल संग्रहण
सरकार की फोर्टिफिकेशन पहल के तहत दूध, तेल, आटा, चावल और नमक में पोषक तत्व जोड़े जा रहे हैं।
जिले में 1506 लीटर इस्तेमाल किया हुआ खाद्य तेल एकत्र कर बायोडीज़ल हेतु भेजा गया।
खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षकों का अनिवार्य प्रशिक्षण जारी है।
बैठक में सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा जगदीश धीमान, डीएफएससी राजीव शर्मा, उपनिदेशक कृषि डॉ. कुलभूषण धीमान सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।