सरकार की नीतियों से पशुपालकों को मिला संबल

rakesh nandan

25/11/2025

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दूध के दाम बढ़ाने का निर्णय छोटे पशुपालकों के लिए नई संभावनाओं का मार्ग खोल रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की इस पहल का लाभ ऊना जिला के कई पशुपालक उठा रहे हैं। इसी कड़ी में चुरूडू गांव के विजय कुमार डेयरी व्यवसाय में सफलता की प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं।


दो पशुओं से शुरुआत, आज 20 पशुओं वाला आधुनिक डेयरी फार्म

चार वर्ष पहले विजय ने सिर्फ दो दुधारू पशुओं से डेयरी की शुरुआत की थी। समय-समय पर दूध के दाम बढ़ने से उन्हें कारोबार को विस्तार देने का आत्मविश्वास मिला। आज उनके पास 12 गायें और 8 बछियां हैं और वह पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित डेयरी का संचालन कर रहे हैं।


प्रतिदिन 80 लीटर उत्पादन, गुणवत्ता के आधार पर 50–52 रुपये प्रति लीटर मूल्य

वर्तमान में विजय रोजाना लगभग 80 लीटर दूध बेच रहे हैं। बेहतर फैट प्रतिशत के कारण उन्हें 50 से 52 रुपये प्रति लीटर तक मूल्य मिल रहा है। विजय ने डेयरी पर एक व्यक्ति को रोजगार भी दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।


हर माह 60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ

डेयरी यूनिट से प्रति माह लगभग 1.10 लाख रुपये की आय होती है। चारा, फीड, बिजली, दवाइयां और श्रम खर्च के बाद विजय करीब 60 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। गांव के संदर्भ में यह आय स्थायी आर्थिक सशक्तिकरण का संकेत है।


आधुनिक मशीनें और उपकरण—समय की बचत और बेहतर गुणवत्ता

सरकारी नीतियों से प्रेरित होकर विजय ने दूध निकालने की मशीन, जनरेटर और सफाई के लिए ट्रैक्टर कार्ट जैसे उपकरण खरीदे हैं, जिससे डेयरी संचालन अधिक सरल और प्रभावी बन गया है।


पशुपालन विभाग का मार्गदर्शन—उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार

पशुपालन विभाग के अधिकारी समय-समय पर फार्म का निरीक्षण करते हैं और स्वास्थ्य, फीड और प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देश देते हैं। इससे दूध की गुणवत्ता और उत्पादन में निरंतर सुधार हुआ है।


पशुपालन विभाग: हिमाचल दूध पर MSP देने वाला पहला राज्य

सहायक निदेशक पशुपालन डॉ. दिनेश परमार ने बताया कि प्रदेश सरकार ने गाय के दूध का MSP 45 से बढ़ाकर 51 रुपये तथा भैंस के दूध का MSP 55 से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया है।
जिला ऊना में 70,000 भैंसें और 50,000 गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 70,000 लीटर दूध उत्पादन होता है।

उन्होंने बताया कि:

  • 81 डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटियां सक्रिय

  • 31 सोसाइटियां मिल्क फेड से जुड़ी

  • प्रतिदिन 5–6 हजार लीटर दूध की खरीद

  • 2 रुपये प्रति लीटर ट्रांसपोर्ट सब्सिडी

  • कांगड़ा डगवार में 1.5 लाख लीटर क्षमता का आधुनिक प्लांट निर्माणाधीन

ये सभी पहलें पशुपालकों को बेहतर दाम दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


उपायुक्त ऊना: सरकारी योजनाओं का लाभ हर ग्रामीण तक पहुंचे

उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। डेयरी को बढ़ावा देने से न केवल ग्रामीण आर्थिकी मजबूत होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।