ऊना जिले के पहाड़ी क्षेत्रों की बंजर जमीन आज एक सफल “ब्लू इकोनॉमी” मॉडल में बदल रही है। मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है और बंगाणा व श्री चिंतपूर्णी जैसे क्षेत्रों में तेजी से सकारात्मक परिवर्तन सामने आ रहे हैं।
80% सब्सिडी के साथ तालाब निर्माण का बड़ा लाभ
मत्स्य पालन विभाग द्वारा लागू की जा रही इस योजना में कार्प मत्स्य पालन तालाबों के निर्माण पर 80% सब्सिडी प्रदान की जा रही है। यह सब्सिडी किसानों को उच्च मूल्य वाली मछली उत्पादन प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
10 किसानों को 28 लाख की सहायता, 2.8 हेक्टेयर भूमि उपयोग
सहायक निदेशक विवेक कुमार ने बताया कि:
बंगाणा व चिंतपूर्णी की पथरीली और अनुपयोगी भूमि को मत्स्य उत्पादन केंद्रों में बदला गया
अब तक 2.8 हेक्टेयर भूमि इस योजना में शामिल
10 किसानों को लगभग 28 लाख रुपये सब्सिडी
10 तालाब तैयार होकर उत्पादन शुरू
इनमें से 2.12 हेक्टेयर भूमि केवल बंगाणा और चिंतपूर्णी क्षेत्र में है, जिसके लिए 21.03 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत हुई।
मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच—स्वरोजगार की नई दिशा
मत्स्य पालन विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का लक्ष्य पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार गतिविधियों को मजबूत करना है। तालाब निर्माण की अधिक लागत को देखते हुए 80% सब्सिडी किसानों के लिए बड़ा सहारा बन रही है।
उन्होंने बताया कि यह योजना—
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता दे रही है
वर्षा आधारित तालाबों के माध्यम से भूजल स्तर को सुधार रही है
पर्यावरण संरक्षण में सहायक है
बंगाणा और चिंतपूर्णी में दिख रहा है बदलाव
पहले जहां खेती कठिन थी और जंगली जानवरों का खतरा था, वहीं आज यह क्षेत्र मत्स्य उत्पादन का मुख्य केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
उपायुक्त जतिन लाल बोले—लोगों के जीवन में ठोस बदलाव प्राथमिकता
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि पात्र किसानों को योजना का पूरा लाभ मिले, जिससे:
आय बढ़े
रोजगार बढ़े
संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो