जिला प्रशासन ने चिट्टा और नशे के खिलाफ decisive लड़ाई का बिगुल बजाते हुए एंटी-चिट्टा अभियान को मिशन मोड में आगे बढ़ा दिया है। उपायुक्त जतिन लाल ने गुरुवार को जिले की चिन्हित 10 संवेदनशील पंचायतों की नशा निवारण समितियों के साथ विस्तृत बैठक कर उन्हें तुरंत सक्रिय मोड में काम करने के निर्देश दिए। बैठक में पुलिस अधीक्षक अमित यादव भी उपस्थित रहे। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का लक्ष्य नशा-मुक्त हिमाचल है और इस दिशा में जनभागीदारी, सामुदायिक जागरूकता और प्रशासनिक सख्ती – तीनों को समान गति से साथ लेकर चलना आवश्यक है।
245 पंचायतों में समितियां गठित, 10 संवेदनशील पंचायतें विशेष फोकस में
डीसी जतिन लाल ने बताया कि जिले की सभी 245 पंचायतों में नशा निवारण समितियां बनाई गई हैं, जिनमें से चिट्टे की गतिविधियों के दृष्टिगत 10 पंचायतों को संवेदनशील चिन्हित किया गया है। इन 10 पंचायतों की समितियों को गुरुवार की बैठक में उनके दायित्व, जिम्मेदारियां और कार्य-योजना विस्तार से बताई गई।
“हर सदस्य ले व्यक्तिगत संकल्प — मेरा क्षेत्र चिट्टा-मुक्त” : डीसी जतिन लाल
उपायुक्त ने सभा में कहा—
समिति का हर सदस्य अपना क्षेत्र चिट्टा-मुक्त बनाने का व्यक्तिगत संकल्प ले।
नशे की किसी भी गतिविधि या सूचना को तुरंत प्रशासन तक पहुंचाना दायित्व है।
युवाओं के व्यवहार में अचानक आए बदलावों को गंभीरता से समझें।
सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
चिट्टे की सप्लाई–डिमांड चेन तोड़ना सबसे बड़ा उद्देश्य है।
उन्होंने साफ कहा कि सरकार ने समितियों को गंभीर जिम्मेदारी सौंपी है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आगामी दिनों में पंचायतों में “विशेष ग्राम सभाएं” आयोजित होंगी, जहां एकमात्र एजेंडा होगा — नशा निवारण और रोकथाम।
समितियों की साप्ताहिक बैठक अनिवार्य — एसडीएम करेंगे समीक्षा
डीसी ने निर्देश दिए—
संवेदनशील पंचायतों की समितियां सप्ताह में एक बार अनिवार्य बैठक करें।
बैठक की सूचना दो दिन पूर्व एसडीएम कार्यालय को भेजें।
एसडीएम मासिक समीक्षा करेंगे।
बैठक की कार्यवाही समिति अध्यक्ष एसडीएम को भेजेंगे।
विस्तृत रिपोर्ट सदस्य सचिव (हेड कांस्टेबल) एसपी कार्यालय को भेजेंगे।
समितियां इन मुख्य कार्यों पर काम करें—
नशे की स्थिति का क्षेत्रवार आकलन
नशा सप्लाई एवं उपभोक्ताओं की पहचान
त्वरित सूचना प्रणाली
स्कूलों व समुदाय में जागरूकता
प्रभावित परिवारों की सहयोग प्रक्रिया
“समुदाय आधारित एक्शन प्लान” तैयार करना
समितियों की संरचना
अध्यक्ष: सरकारी स्कूल का प्रधानाचार्य
सदस्य सचिव: क्षेत्र का पुलिस हेड कांस्टेबल
सदस्य: पंचायत सचिव, महिला मंडल/युवक मंडल प्रतिनिधि, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ नागरिक, ग्राम रोजगार सहायक
एक्स-ऑफिशियो सदस्य: पंचायत प्रधान, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य
चिट्टा तस्करी की सूचना पर इनाम — 10 लाख रुपये तक
उपायुक्त ने बताया कि हिमाचल सरकार ने सूचना देने वालों के लिए 10,000 से 10 लाख रुपये तक की इनामी योजना लागू की है।
बड़े गिरोह की सूचना पर 5 लाख रुपये से अधिक का पुरस्कार निर्धारित है।
आपातकालीन नंबर 112 पर सूचना दी जा सकती है।
“सप्लाई पर सख्त वार होगा, लेकिन डिमांड खत्म करना असली लड़ाई” — एसपी अमित यादव
एसपी ने कहा—
युवाओं के व्यवहार में बदलाव को अनदेखा न करें।
यदि समिति में नाम बताने में संकोच हो तो सदस्य सचिव को निजी रूप से सूचना दें।
गोपनीयता पूर्ण रूप से सुनिश्चित है।
रोकथाम, जागरूकता और काउंसलिंग ही असली हथियार हैं।
समितियां सतत रूप से जागरूकता, काउंसलिंग और मोटिवेशन कार्यक्रम चलाएं।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
बैठक में एसडीएम ऊना अभिषेक मित्तल, एसडीएम हरोली विशाल शर्मा, एसडीएम गगरेट सौमिल गौतम, एसडीएम बंगाणा सोनू गोयल, सहायक आयुक्त वरिंद्र शर्मा, संबंधित विभागों के अधिकारी, संवेदनशील पंचायतों के प्रतिनिधि और समितियों के सभी सदस्य उपस्थित रहे।