भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने कहा कि 15 नवंबर को जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस पूरे देश में उत्साहपूर्वक मनाया गया, लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार इस अवसर पर अपेक्षित कार्यक्रम आयोजित करने में सक्रिय नहीं दिखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को इस राष्ट्रीय दिवस पर बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए था, परंतु सरकार ने उदासीन रवैया अपनाया।
त्रिलोक कपूर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार हर केंद्रीय कार्यक्रम को दरकिनार करती रही है, चाहे वह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसा विश्व स्तर का आयोजन ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस में केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा देशभर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें हिमाचल सरकार की भागीदारी भी होनी चाहिए थी।
जनजातीय नेताओं के योगदान को संरक्षित करने का राष्ट्रीय प्रयास
त्रिलोक कपूर ने बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय देशभर में 11 संग्रहालय स्थापित कर रहा है, जिनमें जनजातीय आंदोलनों, स्वतंत्रता संघर्ष, संस्कृति और इतिहास से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि भारत के जनजातीय समुदायों ने ब्रिटिश शासन और सामंती प्रथाओं के विरुद्ध महत्वपूर्ण संघर्ष किए, परंतु मुख्यधारा के इतिहास में उन्हें पर्याप्त स्थान नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि इन संग्रहालयों की स्थापना से देश के युवाओं और विभिन्न वर्गों को जनजातीय वीरों के संघर्ष, परंपरा और बलिदानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।
बिरसा मुंडा की भूमिका पर प्रकाश
त्रिलोक कपूर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2021 को रांची में बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन किया था।
बिरसा मुंडा ने 1899–1900 के दौरान उलगुलान (महाउग्र विद्रोह) का नेतृत्व किया, जो जनजातीय स्वशासन और सामुदायिक भूमि अधिकारों की बहाली के लिए संगठित आंदोलन था।
उन्होंने कहा कि धरती आबा के नाम से विख्यात बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज को आध्यात्मिक सुधार, सामाजिक चेतना और औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा दी। मात्र 25 वर्ष की आयु में ब्रिटिश शासन ने उन्हें रांची जेल में बंदी बनाकर मार दिया, जो देश के स्वतंत्रता इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है।
बॉक्स समाचार
बिहार में भाजपा की प्रचंड जीत से घबराई कांग्रेस: त्रिलोक कपूर
भाजपा वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने कहा कि बिहार में भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव परिणामों में कांग्रेस का प्रदर्शन एक क्षेत्रीय दल जैसा रहा, जहाँ 60 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद केवल 6 सीटें मिलीं।
उन्होंने दावा किया कि इस रुझान से स्पष्ट है कि वर्ष 2027 में हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस का प्रदर्शन और कमजोर होगा तथा कांग्रेस केवल 5 सीटों तक सिमट सकती है।