त्रिलोक जमवाल का सरकार पर हमला, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

rakesh nandan

28/03/2026

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष का हमला लगातार जारी है। त्रिलोक जमवाल ने पुलिस एवं संबंधित संगठनों की मांग संख्या 7 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सरकार को घेरते हुए प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार की नीयत, नीति और इच्छाशक्ति—तीनों पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो रही है।

⚠️ कार्यवाहक नियुक्तियों पर उठाए सवाल

त्रिलोक जमवाल ने कहा कि पुलिस विभाग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को कार्यवाहक नियुक्तियों के भरोसे चलाना सरकार की अस्थिर सोच को दर्शाता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सक्षम और अनुभवी अधिकारी उपलब्ध हैं, तो स्थायी नियुक्तियां क्यों नहीं की जा रही हैं। उनके अनुसार यह स्थिति प्रशासनिक ढांचे को कमजोर कर रही है।

⚖️ पुलिस विभाग से जुड़े विवादों का जिक्र

जमवाल ने कहा कि हाल ही में पुलिस विभाग के अंदर ही गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए, जिनमें अधिकारियों को उच्च न्यायालय तक व्यक्तिगत रूप से सफाई देनी पड़ी।

उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं प्रदेश की प्रशासनिक विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।

🔍 पुलिस एक्ट में संशोधन पर सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पुलिस एक्ट में संशोधन कर पारदर्शिता को कमजोर किया है।

जमवाल ने कहा कि पुलिस से संबंधित जानकारी को सीमित कर दिया गया है, जिससे आम जनता का भरोसा कम हुआ है और जवाबदेही घटती जा रही है।

🚨 नशे के बढ़ते कारोबार पर चिंता

त्रिलोक जमवाल ने प्रदेश में तेजी से फैल रहे नशे के कारोबार पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में लगभग 13 किलो चिट्टा बरामद हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि वास्तविक खपत इससे कहीं अधिक है।

उन्होंने कहा कि नशा अब गांव-गांव तक पहुंच चुका है, जो समाज और युवाओं के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

🚫 माफिया नेटवर्क पर गंभीर आरोप

जमवाल ने कहा कि प्रदेश में खनन माफिया, वन माफिया, चिट्टा माफिया और अन्य संगठित गिरोह सक्रिय हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन माफियाओं को सरकार का संरक्षण प्राप्त है और कई मामलों में अपराधियों को सजा देने के बजाय उन्हें सुविधाएं दी जा रही हैं।

🔫 बिलासपुर की घटनाओं का जिक्र

उन्होंने बिलासपुर में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि गोलीकांड, सुपारी किलिंग और बढ़ते अपराध सरकार की विफलता को उजागर करते हैं।

उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में एक एसपी को अपनी एफआईआर दर्ज कराने के लिए संघर्ष करना पड़े, वहां आम नागरिक की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

👩‍👩‍👧 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई का मुद्दा

जमवाल ने महिलाओं और सामाजिक संगठनों पर की जा रही कार्रवाई को भी दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि जो लोग समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए आगे आ रहे हैं, उन्हीं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है, जो गलत संदेश देता है।

📢 सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं—

  • पुलिस विभाग में पारदर्शिता और स्थायी नेतृत्व सुनिश्चित किया जाए
  • चिट्टा और माफिया नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जाए
  • ईमानदार पुलिस अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए
  • समाज के सहयोग से नशा मुक्ति अभियान को गंभीरता से लागू किया जाए

🔍 सरकार की इच्छाशक्ति पर सवाल

अंत में त्रिलोक जमवाल ने कहा कि यदि सरकार की इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो चिट्टा और माफिया राज को समाप्त करना संभव है।

लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।