थुनाग में भूकंप जागरूकता दिवस, ड्रिल आयोजित

rakesh nandan

04/04/2026

हिमाचल प्रदेश में 1905 Kangra earthquake की 121वीं वर्षगांठ के अवसर पर औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, थुनाग के गुढ़ारी परिसर में आपदा जागरूकता दिवस आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और स्थानीय समुदाय को आपदा तैयारी तथा जोखिम न्यूनीकरण के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता Dr. P. L. Sharma ने की। उन्होंने अपने संबोधन में छात्रों से सतर्क रहने, आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने और समाज में आपदा के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सही तैयारी और सामूहिक प्रयास से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डॉ. शर्मा ने 4 अप्रैल 1905 को आए कांगड़ा भूकंप के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह भूकंप अत्यंत विनाशकारी था, जिसकी तीव्रता लगभग 7.8 से 7.9 के बीच आंकी गई थी और इसने भारी जन-धन की हानि पहुंचाई थी।

उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा दिसंबर 2025 में जारी अद्यतन भूकंपीय जोन मानचित्र के अनुसार हिमाचल प्रदेश को जोन-6 (उच्चतम भूकंप जोखिम श्रेणी) में रखा गया है। इस कारण प्रदेश में आपदा के प्रति जागरूकता और तैयारी अत्यंत आवश्यक है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में बड़े भूकंप की स्थिति में राज्य में भारी नुकसान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए समय रहते तैयारी, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

कार्यक्रम के तहत 2 अप्रैल को विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें पोस्टर निर्माण, कोलाज और डिक्लेमेशन प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन प्रतियोगिताओं में छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और आपदा प्रबंधन, सुरक्षा उपायों और जागरूकता से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वार्षिक शेकआउट ड्रिल रहा। इस ड्रिल के दौरान “ड्रॉप, कवर और होल्ड” तकनीक का अभ्यास कराया गया, जिसमें छात्रों और स्टाफ को भूकंप के दौरान स्वयं को सुरक्षित रखने के तरीके सिखाए गए। इसके साथ ही निकासी (इवैकुएशन) ड्रिल भी आयोजित की गई, जिसमें आपात स्थिति में सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया।

ड्रिल के दौरान कॉलेज के स्टाफ और छात्रों ने मिलकर सफलतापूर्वक इस अभ्यास को पूरा किया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि आपदा की स्थिति में सभी लोग सही दिशा में और समय पर प्रतिक्रिया दे सकें।

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर शिक्षकों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया और आपदा प्रबंधन के प्रति अपनी जागरूकता और जिम्मेदारी का परिचय दिया।

यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि शैक्षणिक संस्थान किस प्रकार छात्रों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण कौशल भी सिखा रहे हैं। आपदा जागरूकता और तैयारी जैसे विषयों पर इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में संभावित जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।