हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के लिए प्रस्तावित सतलुज पेयजल परियोजना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि वर्तमान सरकार केवल इस परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि इसकी नींव भाजपा सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी।
कर्ण नंदा ने कहा कि वर्ष 2018 में शिमला शहर गंभीर जल संकट से जूझ रहा था। उस समय शहर में पानी की भारी किल्लत हो गई थी, जिससे स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस स्थिति को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाए।
उन्होंने बताया कि इसी दिशा में अप्रैल 2019 में शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (SJPNL) का गठन किया गया था, ताकि शहर में जल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को व्यवस्थित किया जा सके। इसके बाद अगस्त 2021 में लगभग ₹1813 करोड़ की लागत से सतलुज पेयजल योजना को मंजूरी दी गई।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शिमला शहर को 24 घंटे पेयजल उपलब्ध कराना है। योजना के तहत सतलुज नदी के शक्रोली (सुन्नी के पास) क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 67 मिलियन लीटर (MLD) पानी उठाकर पंपिंग के माध्यम से शिमला के संजौली जलाशय तक पहुंचाया जाना है।
कर्ण नंदा ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत लगभग 23 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया था, ताकि सतलुज का पानी सीधे शिमला तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना की परिकल्पना, स्वीकृति और वित्तीय प्रबंधन भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही पूरा कर लिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार इस परियोजना को लेकर केवल श्रेय लेने की राजनीति कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम केवल पहले से चल रही परियोजनाओं पर अपना नाम जोड़ने तक सीमित रह गया है।
भाजपा मीडिया संयोजक ने कहा कि शिमला जैसे ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर के लिए 24 घंटे जल आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है और भाजपा सरकार ने इसी सोच के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की थी।
उन्होंने कांग्रेस सरकार से कई सवाल भी उठाए। कर्ण नंदा ने पूछा कि परियोजना की लागत ₹421 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹500 करोड़ तक क्यों पहुंच गई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि पाइपलाइन बिछाने का कार्य धीमी गति से क्यों चल रहा है और इस देरी के लिए जिम्मेदार कौन है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इन सवालों के जवाब जानना चाहती है। यदि परियोजना समय पर पूरी नहीं होती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा, जो पहले से ही पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
कर्ण नंदा ने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए कई दूरदर्शी योजनाएं शुरू की थीं, लेकिन वर्तमान सरकार उन योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में भी असफल साबित हो रही है।
अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश की जनता को सच्चाई से अवगत कराती रहेगी और कांग्रेस सरकार की श्रेय लेने की राजनीति को उजागर करती रहेगी। यह मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है, क्योंकि जल संकट जैसे संवेदनशील विषय पर दोनों दलों के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है।