सतलुज में गाद पर डीसी के सख्त निर्देश

rakesh nandan

21/02/2026

सतलुज नदी में गाद जमा होने पर प्रशासन अलर्ट

Anupam Kashyap, उपायुक्त शिमला एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सुन्नी क्षेत्र में Sutlej River में गाद (सिल्ट) जमा होने की गंभीर समस्या को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने उपमंडल दण्डाधिकारी सुन्नी को संभावित खतरे की पहचान कर विस्तृत रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को शीघ्र प्रेषित करने के निर्देश दिए, ताकि गाद निकालने का कार्य जल्द आरंभ किया जा सके।


नुकसान का आकलन तैयार करने के निर्देश

उपायुक्त ने विभिन्न विभागों को निर्देश दिए हैं कि गाद जमा होने से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार किया जाए।

रिपोर्ट में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं:

  • आवासीय मकानों को नुकसान

  • कृषि भूमि पर प्रभाव

  • पेयजल योजनाएं

  • पावर हाउस

  • सड़कें

  • सीवेज लाइनें

  • गौशालाएं

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला सुन्नी क्षेत्र के लोगों के जीवन और संपत्ति से जुड़ा है, इसलिए किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।


समीक्षा बैठक में विस्तृत चर्चा

उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में सुन्नी क्षेत्र में गाद जमा होने की गंभीर स्थिति और वन विभाग की रिपोर्ट पर चर्चा की गई।

उपमंडल दण्डाधिकारी सुन्नी Rajesh Verma ने बताया कि तहसील सुन्नी के अंतर्गत मोहाल अनु से मोहाल लुनसु तक का क्षेत्र, जो झूले वाले पुल के पास स्थित है और लुनसु को तहसील करसोग से जोड़ता है, अत्यंत संवेदनशील है।

उन्होंने इस क्षेत्र को संवेदनशील घोषित करने का प्रस्ताव रखा ताकि विशेष निगरानी रखी जा सके।


गाद के स्टोरेज और डिस्पोजल की व्यवस्था

एसडीएम ने जानकारी दी कि निकाली जाने वाली गाद के भंडारण और निस्तारण के लिए सतलुज नदी के बाएं किनारे पर भूमि की पहचान कर ली गई है।

यह कदम पर्यावरणीय संतुलन और सुरक्षित निष्पादन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


संभावित खतरे को लेकर चिंता

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि सतलुज नदी में गाद का यह मामला सुन्नी क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद गंभीर है।

उन्होंने कहा कि गाद जमा होने से नदी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे बाढ़ या कटाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

इससे घरों, खेतों और आधारभूत ढांचे को खतरा बढ़ जाता है।


विभिन्न विभागों की सहभागिता

बैठक में प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:

  • अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा

  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा

  • डीएसपी विजय रघुवंशी

  • अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग राजेश अग्रवाल

  • रेंज वन अधिकारी देवी सिंह

  • विद्युत एवं जल शक्ति विभाग के अधिकारी

  • जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रतिनिधि

सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।


शीघ्र कार्रवाई पर जोर

उपायुक्त ने कहा कि जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार कर प्रेषित की जाए ताकि आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी कार्रवाई शुरू की जा सके। उन्होंने कहा कि समय रहते गाद हटाने का कार्य शुरू किया जाना आवश्यक है, अन्यथा आने वाले समय में समस्या और गंभीर हो सकती है।


निष्कर्ष

सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी में गाद जमा होने की समस्या को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर त्वरित कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है, और संबंधित विभागों को समन्वित प्रयासों के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।