सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में उठाया आपदा मुद्दा

rakesh nandan

10/03/2026

लोकसभा में हिमाचल की आपदाओं का मुद्दा उठाया

सुरेश कश्यप, शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद ने लोकसभा में हिमाचल प्रदेश विशेषकर शिमला और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने वर्ष 2025 के मानसून और प्री-मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा, शहरी बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं में वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि इन आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और विशेष तंत्र के माध्यम से क्या कदम उठाए जा रहे हैं। सांसद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसलिए समय रहते वैज्ञानिक पूर्वानुमान और प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली बेहद आवश्यक है।


केंद्र सरकार ने दी आपदा प्रबंधन प्रणाली की जानकारी

सांसद के प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया कि देश में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में संशोधन कर धारा 41-A जोड़ी गई है। इसके तहत राज्य सरकारों को राजधानी और नगर निगम क्षेत्रों में शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (Urban Disaster Management Authority – UDMA) गठित करने का अधिकार दिया गया है। इस प्राधिकरण का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना है।


राष्ट्रीय आपदा डाटाबेस तैयार किया जा रहा

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक राष्ट्रीय आपदा डाटाबेस तैयार किया जा रहा है।

इस डाटाबेस में निम्न जानकारी शामिल की जाएगी:

  • जोखिम आकलन

  • आपदा शमन योजनाएं

  • वास्तविक समय का डेटा

  • प्रभावित क्षेत्रों का विश्लेषण

इस डेटा के आधार पर भविष्य में आपदा प्रबंधन की रणनीतियों को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाया जा सकेगा।


मौसम पूर्वानुमान में एआई तकनीक का उपयोग

केंद्र सरकार ने बताया कि मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को भी अत्याधुनिक बनाया जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) अब कई मामलों में सात दिन पहले तक मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम हो रहा है। इसके अलावा मिशन मौसम के तहत एआई आधारित सिमुलेशन प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे चक्रवात, भारी वर्षा और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं का पहले से आकलन किया जा सकेगा। इस तकनीक से संभावित आपदाओं के बारे में पहले ही चेतावनी जारी करना संभव होगा।


राज्यों को मिलती है आर्थिक सहायता

गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों को राहत और पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

इसके लिए मुख्य रूप से दो प्रमुख फंड उपलब्ध हैं:

  • राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF)

  • राष्ट्रीय आपदा शमन निधि (NDMF)

इन निधियों के माध्यम से बाढ़, भूस्खलन, बादल फटने जैसी आपदाओं के बाद राहत और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए राज्यों को सहायता दी जाती है। सरकार ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न राज्यों को राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से 4576.7 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को गति देने के लिए प्रदान की गई है।


पहाड़ी राज्यों के लिए जरूरी मजबूत तंत्र

इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए आधुनिक तकनीक आधारित आपदा प्रबंधन प्रणाली बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगातार बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए समय पर चेतावनी प्रणाली, वैज्ञानिक पूर्वानुमान और मजबूत राहत तंत्र विकसित करना आवश्यक है। सांसद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता की सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाना उनकी प्राथमिकता है।


संसद में उठाया जनता से जुड़ा मुद्दा

सांसद के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं के कारण हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष भारी नुकसान होता है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक का उपयोग और वैज्ञानिक योजनाओं के माध्यम से आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी हिमाचल प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को संसद में उठाते रहेंगे ताकि प्रदेश के लोगों को बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं मिल सकें।