किसानों की बेदखली पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे

rakesh nandan

18/12/2025

हिमाचल किसान सभा, जिला सिरमौर ने किसानों की बेदखली और भूमि से जुड़े गंभीर मुद्दे को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका, सामाजिक न्याय और जनकल्याण से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

किसान सभा ने जानकारी दी कि 02 जुलाई 2025 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा किसानों की बेदखली और भूमि मामलों से संबंधित एक आदेश पारित किया गया था, जिसके विरुद्ध 28 जुलाई 2025 को डिवीजन बेंच में याचिका दायर की गई। इस पर 16 दिसंबर 2025 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उक्त आदेशों पर स्थगन (स्टे) लगा दिया है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।

हिमाचल किसान सभा ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह सीमांत और वंचित किसानों को भूमि उपलब्ध करवाने के लिए एक नीति तैयार करे तथा इस नीति को केंद्र सरकार से अनुमोदित करवाए। साथ ही छोटे किसानों को 5 बीघा तक भूमि के नियमितीकरण की प्रक्रिया अपनाने के भी निर्देश दिए गए हैं। संगठन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय राज्य है, जहां अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और कृषि व पशुपालन ही मुख्य आजीविका का आधार है। ऐसे में भूमिहीन किसानों और गरीब परिवारों को भूमि उपलब्ध करवाना अत्यंत आवश्यक है।

किसान सभा ने यह भी स्पष्ट किया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेशों में इसे केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय माना है। संगठन ने मांग की कि किसानों की आजीविका को छीना न जाए, बल्कि उन्हें सुरक्षित और संरक्षित किया जाए। हिमाचल किसान सभा ने संबंधित प्रशासन से आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को स्थायी राहत मिल सके।