हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष प्रदेश के सेब उत्पादकों के हितों की पुरजोर वकालत की। मुख्यमंत्री ने बागवानों की समस्याओं पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। मुख्यमंत्री ने विदेशी सेबों के बढ़ते आयात से हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को हो रही भारी क्षति की ओर वित्त मंत्री का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने लगभग 2.5 लाख सेब उत्पादकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सेब को ‘विशेष श्रेणी’ में शामिल करने की मांग की, ताकि प्रदेश के किसानों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से संरक्षण मिल सके। उन्होंने हिमाचल में सेब उत्पादन की जुलाई से नवंबर की अवधि के दौरान सेब आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त ऑफ-सीजन में विदेशी सेबों की डंपिंग रोकने के लिए आयात शुल्क को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने तथा मात्रात्मक प्रतिबंध (Quantitative Restriction) लगाने की भी मांग रखी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि हाल ही में प्रदेश के बागवानों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था, जिसने न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क घटाने से हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद पिछले एक दशक में वहां से सेब आयात ढाई गुना बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेब राज्य के रूप में प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन से हर वर्ष लगभग 4,500 करोड़ रुपये की आय होती है, जो राज्य के कुल फल उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत है। सेब उत्पादन से 2.5 लाख परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है और इससे लगभग 10 लाख मानव-दिवस सृजित होते हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यापार नीतियों के कारण छोटे और सीमांत किसान संकट में हैं और इनसे देश के किसानों के बजाय विदेशी कंपनियों को लाभ पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार बागवानों और छोटे किसानों की आजीविका सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के भाजपा नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए उनसे आग्रह किया कि प्रदेश हित और सेब उत्पादकों के मुद्दों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष मजबूती से उठाया जाए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार तथा मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर उपस्थित रहे।