सुजानपुर होली 2026 में दिनभर लोक संस्कृति की झलक
सुजानपुर टीरा में आयोजित राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव-2026 इस बार सांस्कृतिक विविधता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। जहां शाम की सांस्कृतिक संध्याओं में नामी कलाकार मंच सजा रहे हैं, वहीं दिन के समय भी जिला हमीरपुर की समृद्ध लोक संस्कृति की शानदार झलक देखने को मिल रही है। होली उत्सव आयोजन समिति ने पहली बार प्रदर्शनी स्टॉलों के बीच विशेष रूप से एक अलग मंच का निर्माण किया है। इस मंच पर प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
पहले दिन कवि सम्मेलन और भजन गायन
उत्सव के पहले दिन 1 मार्च को इसी मंच पर कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। जिले भर के कवियों ने हिंदी और पहाड़ी भाषा में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। सांस्कृतिक गतिविधियों के संयोजक एवं जिला भाषा अधिकारी संतोष कुमार पटियाल के मार्गदर्शन में पारंपरिक भजन गायन मंडलियों को भी मंच दिया गया। एकतारा, करताल और छोटी डफली (डौरू) के साथ भजनों और दोहों का गायन किया गया। हमीरपुर, बिलासपुर और मंडी के निचले क्षेत्रों की यह प्राचीन परंपरा अब लुप्त होने की कगार पर है, लेकिन होली के मंच पर इसकी प्रस्तुति ने लोगों को भावविभोर कर दिया।
चित्रकला और लोकनृत्य प्रतियोगिता
प्रदर्शनी परिसर में चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें युवाओं ने अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उत्सव के दूसरे दिन लोकनृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें कुसुम कला मंच ने पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि डिग्री कॉलेज सुजानपुर के दल ने दूसरा और शुभम कला मंच ने तीसरा स्थान हासिल किया। स्थानीय विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने विजेता दलों को पुरस्कार वितरित किए।
पुरस्कार राशि
आयोजन समिति ने विजेता दलों के लिए आकर्षक नकद पुरस्कार निर्धारित किए हैं:
प्रथम स्थान: 11,000 रुपये
द्वितीय स्थान: 5,100 रुपये
तृतीय स्थान: 3,100 रुपये
प्रतियोगिता के साथ सामूहिक लोकनृत्य “झमाकड़ा” भी आयोजित किया गया, जिसमें जिले भर की सैकड़ों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह दृश्य होली उत्सव का विशेष आकर्षण बना।
तीसरे दिन गूग्गा गाथा और धाहजा
उत्सव के तीसरे दिन 3 मार्च को जिला हमीरपुर की पारंपरिक गूग्गा गाथा का गायन किया गया। इसके साथ ही लोक नाट्य “धाहजा” की प्रस्तुतियां भी दी गईं। जिले के विभिन्न लोक सांस्कृतिक दलों ने इन प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। दर्शकों ने इन कार्यक्रमों का भरपूर आनंद लिया।
लोक परंपराओं को नया मंच
राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण का मंच भी बनता जा रहा है। दिन के समय आयोजित गतिविधियों ने यह साबित किया कि स्थानीय लोक परंपराएं आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। इस बार की पहल से न केवल स्थानीय कलाकारों को अवसर मिला, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ।