धर्मशाला के विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि आज हिमाचल प्रदेश जिन गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक संकटों से गुजर रहा है, उसके लिए सीधे तौर पर सरकार की गलत नीतियां और लापरवाह कार्यप्रणाली जिम्मेदार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रदेश की जनता सरकार की विफलताओं की सज़ा क्यों भुगते।
सुधीर शर्मा ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वित्त आयोग जैसे संवैधानिक मंच के समक्ष प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखने में सरकार पूरी तरह असफल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रामक और गलत आंकड़े भेजकर हिमाचल की वास्तविक आर्थिक स्थिति को कमजोर रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसका खामियाजा आज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) से जुड़ा निर्णय एक राष्ट्रीय नीतिगत फैसला है, लेकिन प्रदेश सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है।
पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने प्रति व्यक्ति आय को वास्तविकता से अधिक दर्शाया और बीपीएल सूची से लाखों पात्र लोगों के नाम हटाए, जिससे केंद्रीय सहायता और कल्याणकारी योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। सुधीर शर्मा ने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों पर अत्यधिक निर्भरता से प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हुई है और कार्यरत अधिकारियों का मनोबल गिरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सक्षम अधिकारी उपलब्ध हैं, तो रिटायर्ड अधिकारियों को आगे क्यों किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि “2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल” जैसे दावे केवल नारों तक सीमित हैं। आत्मनिर्भरता स्पष्ट नीति, सही आंकड़ों और मजबूत इच्छाशक्ति से आती है, न कि खोखले दावों से। अंत में उन्होंने प्रदेश सरकार से अपने फैसलों की जिम्मेदारी स्वीकार करने और हिमाचल की जनता के सामने एक स्पष्ट, ईमानदार और विश्वसनीय आर्थिक रोडमैप प्रस्तुत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की जनता को आरोप नहीं, बल्कि जवाब चाहिए।