जिला बिलासपुर में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के नियमों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एस. पी. कत्याल ने की। बैठक में खाद्यान्न उपलब्धता, गुणवत्ता, शिकायत निवारण तथा विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में एडीसी ओमकांत ठाकुर, डीएफएससी बृजेन्द्र पठानिया, उप-निदेशक शिक्षा विभाग तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) हरीश मिश्रा उपस्थित रहे।
डॉ. कत्याल ने निर्देश दिए कि पीडीएस प्रणाली में सप्लाई चेन से लेकर उपभोक्ताओं तक प्रत्येक स्तर पर खाद्यान्न की गुणवत्ता और मात्रा की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने उचित मूल्य दुकानों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, मिड-डे-मील योजना से जुड़ी पाठशालाओं तथा थोक गोदामों का निरंतर निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को खाद्यान्न वितरण प्रणाली, सरकारी नीतियों और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे योजनाओं का लाभ पूर्ण रूप से प्राप्त कर सकें।
बैठक में सर्तकता समितियों के कार्यों की समीक्षा की गई और गैर-सरकारी सदस्यों के लंबित नामांकन को सरकार के समक्ष पुनः भेजने का निर्णय लिया गया।
अतिरिक्त उपायुक्त ओम कांत ठाकुर ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान जिला में खाद्य सुरक्षा से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और विभाग नियमित रूप से गुणवत्ता निरीक्षण करता रहा है।
डीएफएससी बृजेन्द्र पठानिया ने बताया कि जिला के 1,77,437 लाभार्थियों को प्रति माह निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नियमित रूप से उपलब्ध करवाया जा रहा है।
उप-निदेशक शिक्षा विभाग ने बताया कि मिड-डे-मील योजना के तहत 793 स्कूलों के माध्यम से 27,856 पात्र विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं आईसीडीएस विभाग ने बताया कि 2,290 गर्भवती महिलाओं, 1,847 धात्री माताओं और 0–6 वर्ष के 13,338 बच्चों को 1,111 आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से पोषणयुक्त आहार दिया जा रहा है।
बैठक के उपरांत डॉ. कत्याल ने पीडीएस खाद्यान्न के रख-रखाव का स्थलीय निरीक्षण भी किया और गुणवत्ता जांच हेतु नमूने प्रयोगशाला भेजे।