सिरमौर में अल्पसंख्यक व दिव्यांग योजनाओं की समीक्षा

rakesh nandan

23/03/2026

जिला सिरमौर में विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए उपायुक्त प्रियंका वर्मा की अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नया-15 सूत्रीय कार्यक्रम, जिला स्तरीय दिव्यांगता समिति, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत सतर्कता एवं प्रबोधन समिति तथा मैनुअल स्कैवेंजिंग उन्मूलन से जुड़े मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने बताया कि जिला सिरमौर की कुल जनसंख्या लगभग 5,29,855 है, जिसमें अल्पसंख्यक वर्ग की आबादी 53,025 है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 10.01 प्रतिशत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए संचालित योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचे।

उन्होंने जानकारी दी कि जिला एवं तहसील कल्याण कार्यालयों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण सहायता प्रदान की जा रही है। 1 दिसंबर 2025 से 20 मार्च 2026 के बीच जिले के 34 लाभार्थियों को ₹1 करोड़ 72 लाख 50 हजार की राशि सरल ऋण के रूप में वितरित की गई है, जिससे लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

उपायुक्त ने एकीकृत आवास कार्यक्रम और जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने नगर निकायों को निर्देश दिए कि अल्पसंख्यक समुदाय के क्षेत्रों में स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से स्लॉटर हाउस के शीघ्र संचालन और मांस की दुकानों के नियमित निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए।

इसके बाद आयोजित जिला स्तरीय दिव्यांगता समिति की बैठक में दिव्यांगजनों के कल्याण से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025-26 में दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 102 विद्यार्थियों को लगभग ₹12.50 लाख की राशि प्रदान की गई है। इसके अलावा दिव्यांग विवाह अनुदान योजना के तहत 18 लाभार्थियों को ₹6.50 लाख की सहायता दी गई है।

उपायुक्त ने निर्देश दिए कि ‘सिपड़ा योजना’ के अंतर्गत सरकारी भवनों को दिव्यांगजन अनुकूल बनाया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए। साथ ही दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत प्रत्येक सरकारी कार्यालय में शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करने पर भी जोर दिया गया।

उन्होंने राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में अब तक 208 कानूनी संरक्षक प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों को कानूनी संरक्षण और सहायता प्रदान की जा रही है।

बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और पीड़ितों को समय पर न्याय मिले।

इसके अलावा मैनुअल स्कैवेंजिंग उन्मूलन से संबंधित बैठक में भी प्रगति की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि इस अमानवीय प्रथा को समाप्त करने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

बैठक का संचालन जिला कल्याण अधिकारी गावा सिंह नेगी ने किया। इस दौरान जिला अटॉर्नी चंपा सुरेल, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एल.आर. वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश रोल्टा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और गैर-सरकारी सदस्य भी उपस्थित रहे।

अंत में उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने कहा कि सभी योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना है और प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचे।