Sirmaur जिले में लिंग चयन और कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए PCPNDT Act के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी Dr Rakesh Pratap ने की।
बैठक में अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इस अधिनियम के प्रावधानों और इसके सख्त अनुपालन की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। बताया गया कि पीसी-पीएनडीटी अधिनियम का मुख्य उद्देश्य गर्भधारण से पहले या बाद में लिंग चयन की तकनीकों के दुरुपयोग को रोकना और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगाना है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अल्ट्रासाउंड या किसी अन्य तकनीक के माध्यम से भ्रूण के लिंग का पता लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस अधिनियम के तहत सभी अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में जिला सिरमौर में कुल 24 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जिनमें से 8 सरकारी क्षेत्र में और 16 निजी क्षेत्र में हैं। इन सभी क्लीनिकों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
वर्ष 2025 के दौरान जिले में कुल 42 अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जिसमें सभी केंद्र अधिनियम के निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। यह प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता को दर्शाता है।
बैठक में जिले के लिंग अनुपात पर भी चर्चा की गई। वर्तमान में सिरमौर का व्यस्क लिंग अनुपात 1000 पुरुषों के मुकाबले 923 महिलाओं का है, जबकि जन्म के समय लिंग अनुपात 925 दर्ज किया गया है। हालांकि यह स्थिति सुधार की दिशा में है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
सरकार द्वारा लिंग अनुपात सुधारने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। जिन पंचायतों में लिंग अनुपात बेहतर होता है, उन्हें 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
इसके अलावा Indira Gandhi Balika Suraksha Yojana के तहत एक बेटी के जन्म के बाद स्थायी परिवार नियोजन अपनाने पर ₹35,000 और दो बेटियों के बाद स्थायी परिवार नियोजन करने पर ₹25,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। लोगों की मानसिकता में बदलाव लाकर ही लिंग अनुपात में स्थायी सुधार किया जा सकता है।
बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निसार अहमद, जिला न्यायवादी चंपा सुरेल, डॉ. अमोद, डॉ. दिनेश, डॉ. ईशान शर्मा सहित समिति के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, यह बैठक जिले में पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और लिंग समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।