सिरमौर में मजदूरों का प्रदर्शन, लेबर कोड का विरोध

rakesh nandan

01/04/2026

Sirmaur जिले में मजदूर संगठनों ने आज “ब्लैक डे” के रूप में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। विभिन्न फैक्ट्रियों के गेट पर एकजुट होकर मजदूरों ने इन कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद की और सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की।

इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन CITU से जुड़े श्रमिक संगठनों द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनियन के अध्यक्ष लेखराज और महासचिव बंसी लाल ने की। इस मौके पर सीटू जिला महासचिव Ashish Kumar भी मौजूद रहे।

आशीष कुमार ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चारों लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाले “काले कानून” हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के लागू होने से मजदूरों के काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे तक किए जा सकते हैं, जिससे श्रमिकों का शोषण और बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि इन लेबर कोड के जरिए मजदूरों के यूनियन बनाने के अधिकार को भी कमजोर किया जा रहा है। इससे श्रमिकों की सामूहिक आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी चिंता जताई कि इन कानूनों के लागू होने से मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा। पीएफ, ईएसआई और अन्य सुविधाओं को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे श्रमिकों का भविष्य प्रभावित होगा।

इस दौरान बड़ी संख्या में मजदूर नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें सीटू जिला उपाध्यक्ष लेखराज, यूनियन के महासचिव बंसी लाल, पूर्व महासचिव जलम सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेश, अजीत पाल और किसान सभा के पूर्व राज्य उपाध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा शामिल रहे।

प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया और लेबर कोड को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि इन कानूनों को लागू किया गया, तो इससे श्रमिक वर्ग पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

मजदूर संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बड़े स्तर पर प्रदर्शन और हड़तालें भी आयोजित की जा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लेबर कोड को लेकर देशभर में बहस जारी है। एक ओर सरकार इसे श्रम कानूनों को सरल बनाने और उद्योगों को बढ़ावा देने का कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर श्रमिक संगठन इसे मजदूरों के अधिकारों पर हमला मान रहे हैं।

कुल मिलाकर, सिरमौर में हुआ यह प्रदर्शन दर्शाता है कि श्रमिक वर्ग इन कानूनों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के लिए तैयार है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक जोर पकड़ सकता है।