सिरमौर में फायर सीजन अलर्ट, वन कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द

rakesh nandan

09/04/2026

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में आगामी फायर सीजन को देखते हुए वन विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। जंगलों को आगजनी की घटनाओं से बचाने के लिए विभाग ने अपने कर्मचारियों की आगामी तीन महीनों के लिए छुट्टियां रद्द कर दी हैं और उन्हें 24 घंटे तैनात रहने के निर्देश दिए हैं।

इस संबंध में जानकारी देते हुए वन विभाग पांवटा साहिब के डीएफओ वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि फायर सीजन के दौरान जंगलों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने पहले से ही व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।


🔹 24 घंटे निगरानी और तैनाती

वन विभाग ने सभी कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जंगलों की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैनात रहें। विशेष रूप से दूर-दराज़ और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है, जहां आग लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना रहती है।

डीएफओ ने बताया कि इस अवधि के दौरान किसी भी कर्मचारी को छुट्टी नहीं दी जाएगी, ताकि हर समय पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध रहे और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।


🔹 वॉकी-टॉकी से होगी त्वरित सूचना

जिन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या रहती है, वहां सूचना के आदान-प्रदान में देरी एक बड़ी चुनौती होती है। इस समस्या से निपटने के लिए वन विभाग ने वॉकी-टॉकी का उपयोग शुरू करने का निर्णय लिया है।

इससे आगजनी की घटनाओं की सूचना तुरंत संबंधित टीम तक पहुंच सकेगी और समय रहते आग पर काबू पाया जा सकेगा। यह कदम जंगलों को बड़े नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभाएगा।


🔹 ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान

वन विभाग केवल तकनीकी उपायों पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि लोगों को भी जागरूक करने पर जोर दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर लोगों को बताया जा रहा है कि वे जंगलों में आग लगाने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर जंगल की आग मानवीय लापरवाही के कारण लगती है, इसलिए जनभागीदारी इस समस्या के समाधान में बेहद महत्वपूर्ण है।


🔹 फायर सीजन में बढ़ता खतरा

गर्मियों के मौसम में सूखी घास, पत्तियां और तेज हवाएं आग को तेजी से फैलने में मदद करती हैं। ऐसे में छोटे स्तर की आग भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है। इसी कारण वन विभाग ने पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी है।


🔹 पर्यावरण और वन संपदा की सुरक्षा

जंगलों में आग लगने से न केवल वन संपदा को नुकसान होता है, बल्कि वन्य जीवों का जीवन भी खतरे में पड़ जाता है। इसके अलावा पर्यावरण पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।

वन विभाग के इन प्रयासों का उद्देश्य जंगलों को सुरक्षित रखना और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना है।