सिरमौर में 11वां जिला सम्मेलन संपन्न

rakesh nandan

01/03/2026

सिरमौर का 11वां जिला सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न

सिरमौर जिला में 11वां जिला सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तनवर ने किया। इस अवसर पर राज्य महासचिव राकेश सिंघा ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए संगठित संघर्ष को तेज करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को भूमि, न्यूनतम समर्थन मूल्य और ऋण राहत जैसे मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।

संगठनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत

जिला महासचिव राजेंद्र ठाकुर ने पिछले तीन वर्षों की संगठनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि संगठन ने इस अवधि में विभिन्न किसान मुद्दों को लेकर धरना-प्रदर्शन और जागरूकता अभियान चलाए। सम्मेलन में संगठन की मजबूती और विस्तार पर विशेष चर्चा की गई।

29 सदस्यीय नई जिला कमेटी का गठन

सम्मेलन में 29 सदस्यीय नई जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया। राजेंद्र ठाकुर को अध्यक्ष, धनीराम शर्मा को महासचिव और राम सिंह वालिया को कोषाध्यक्ष चुना गया। उपाध्यक्ष के रूप में सतपाल मान, जीवन सिंह, गुरविंद्र सिंह, रविंदर चौहान और दिनेश शर्मा को जिम्मेदारी दी गई। सह सचिव के रूप में नैन सिंह, सनी कुमार, श्रवण सिंह और अभय धामटा को चुना गया। कमेटी के अन्य सदस्यों में जगदीश पुंडीर, बकदेव सिंह, सुरेंद्र रजनीश, काबलदीन, गौरव, रामकुमार, रामनलाल, सुंदर सिंह और बिशन सिंह सहित अन्य साथियों को शामिल किया गया। नई कार्यकारिणी से संगठन को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।

5 बीघा भूमि देने की मांग

सम्मेलन में प्रमुख रूप से यह मांग उठाई गई कि सभी किसान परिवारों को न्यूनतम 5 बीघा भूमि उपलब्ध करवाई जाए। नेताओं का कहना था कि भूमि के अभाव में छोटे और सीमांत किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। इसके अलावा नए बिजली बिल और स्मार्ट मीटर नीति को वापस लेने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते बिजली शुल्क से किसानों की लागत बढ़ रही है।

MSP को कानूनी दर्जा देने की मांग

सम्मेलन में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी रूप से सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। नेताओं ने कहा कि जब तक MSP को कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। छोटे किसानों के कृषि ऋण माफ करने और मनरेगा कानून को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। साथ ही राजस्व अनुदान (RDG) को प्रदेश हित में पुनः लागू करने पर जोर दिया गया।

व्यापक जनआंदोलन का निर्णय

सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि इन सभी मांगों को लेकर जिला स्तर पर व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा। प्रतिनिधियों ने कहा कि संगठन गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेगा और संघर्ष को तेज करेगा। नेताओं ने सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष को भी तेज करने की बात कही और सामाजिक एकता बनाए रखने का आह्वान किया।