मंडलीय मुख्यालय शिमला में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिला शिमला, सोलन और सिरमौर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) तथा जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों के आईटी स्टाफ ने भाग लिया।
कार्यशाला की अध्यक्षता उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिमला अनुपम कश्यप ने की। उन्होंने कहा कि SIR एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में उच्च स्तर से लेकर बूथ स्तर तक सभी संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की गलती की संभावना न रहे।
उन्होंने जानकारी दी कि इस दिशा में मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ट्रेनिंग दिल्ली में आयोजित की जा चुकी है। इसके पश्चात प्रदेश के सभी 12 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। अब जिला और बूथ स्तर तक इस प्रशिक्षण को पहुंचाया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहे।
अनुपम कश्यप ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे SIR के तकनीकी पहलुओं को गंभीरता से समझें और हर कार्य को सावधानीपूर्वक करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में उपस्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी प्रतिभागियों की सभी शंकाओं का समाधान करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि जिला शिमला में वर्ष 2002 से 2025 तक मतदाता सूची का व्यापक मिलान किया गया, जिसमें सूची 98 प्रतिशत तक सटीक पाई गई। यह एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन शेष त्रुटियों को भी समाप्त करना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि हर पात्र व्यक्ति तक फॉर्म पहुंचे और कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न रहे।
इसके साथ ही उन्होंने आगामी कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि SIR के साथ-साथ जनगणना (Census) और पंचायती राज चुनाव भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में अधिकारियों को उपलब्ध जनशक्ति का संतुलित और तर्कसंगत उपयोग करना होगा, ताकि सभी कार्य सुचारू रूप से पूरे हो सकें।
उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी आवश्यक जानकारी देने पर बल दिया, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
कार्यशाला में अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ मुरारी लाल ने भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि देश के 12 राज्यों में SIR प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और अब हिमाचल प्रदेश में इसे लागू किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से प्रशिक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
डॉ मुरारी लाल ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रह जाए। उन्होंने प्रशिक्षण के उद्देश्यों और प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपेंद्र शुक्ला ने SIR की सारणी और संबंधित अधिकारियों के कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं, वीरेंद्र चौहान ने SIR में उपयोग होने वाली आईटी एप्लिकेशन्स के बारे में तकनीकी जानकारी साझा की।
इसके अलावा, कार्यशाला में स्वीप (SVEEP), मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका, तथा SIR के दौरान आने वाली संभावित जनसमस्याओं पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि अगले चरण में जिला स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे, जिनमें वे अधिकारी शामिल होंगे जो इस कार्यशाला में भाग नहीं ले सके। इसके साथ ही, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा बूथ स्तर के अधिकारियों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त शिमला सचिन शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था) पंकज शर्मा सहित निर्वाचन विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
यह कार्यशाला आगामी चुनावी प्रक्रियाओं को सुचारू और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।