शूलिनी यूनिवर्सिटी में छात्र की संदिग्ध मौत पर बवाल

rakesh nandan

31/03/2026

Shoolini University में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद परिसर में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया है। इस घटना ने न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे छात्र समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद सैकड़ों छात्र एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे और न्याय की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय में छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और प्रशासनिक जवाबदेही की व्यवस्था पूरी तरह से विफल रही है।

Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (एबीवीपी) ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। परिषद का आरोप है कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही और छात्रों की समस्याओं की अनदेखी का परिणाम है।

एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री Abhi Thakur ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते छात्र की समस्या को गंभीरता से लिया होता, तो इस दुखद घटना को टाला जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन इस मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है, जो अत्यंत निंदनीय है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि एबीवीपी इस मामले को किसी भी कीमत पर दबने नहीं देगी और जब तक सच्चाई सामने नहीं आती तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला, तो विद्यार्थी परिषद पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी।

छात्रों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे छात्रों में असंतोष बढ़ता गया।

इस घटना के बाद एबीवीपी ने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मामले की उच्च स्तरीय या न्यायिक जांच, दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई, विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करना और छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रणाली स्थापित करना शामिल है।

छात्र संगठन ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई से ही छात्रों का विश्वास बहाल किया जा सकता है।

यह घटना एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को सामने लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा तक सीमित न रहकर छात्रों के समग्र विकास और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी गंभीर प्रयास करने चाहिए।

कुल मिलाकर, शूलिनी यूनिवर्सिटी में हुई यह घटना कई सवाल खड़े करती है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। फिलहाल छात्रों का आक्रोश जारी है और सभी की नजरें इस मामले की जांच और उसके परिणाम पर टिकी हुई हैं।