Students’ Federation of India (SFI) के जिला सचिव पवन कुमार ने बताया कि संगठन के आह्वान पर शिमला जिले के विभिन्न महाविद्यालयों — कोटशेरा, आरकेएमवी, संजौली, एचपीयूडीईएस, करसोग, रामपुर, सावड़ा, ठियोग, कोटि और आनी — में छात्र हितों से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर व्यापक धरना-प्रदर्शन आयोजित किए गए। छात्रों का कहना है कि शैक्षणिक, प्रशासनिक और बुनियादी समस्याओं की अनदेखी से शिक्षा का वातावरण प्रभावित हो रहा है।
रिक्त पद और शिक्षण गुणवत्ता का मुद्दा
प्रदर्शन में शिक्षकों के रिक्त पदों को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। कई विभागों में नियमित प्राध्यापक उपलब्ध नहीं हैं और कक्षाएं अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रही हैं। SFI ने मांग की कि सभी रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्तियां शीघ्र की जाएं तथा सेमेस्टर शुरू होने से पहले पूर्ण स्टाफ तैनात किया जाए।
परीक्षा परिणाम और मूल्यांकन
छात्रों ने परीक्षा परिणामों में देरी पर रोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि परिणाम समय पर घोषित न होने से उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं। पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली और सरल पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई।
पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं की स्थिति
कई महाविद्यालयों में अद्यतन पुस्तकों और डिजिटल संसाधनों की कमी बताई गई। विज्ञान प्रयोगशालाओं में उपकरणों के अभाव से व्यावहारिक शिक्षा प्रभावित हो रही है। छात्रों ने ई-लाइब्रेरी सुविधा और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग रखी।
छात्रावास और फीस वृद्धि
छात्रावासों में सीमित सीटों, स्वच्छता, सुरक्षा और इंटरनेट जैसी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया। फीस वृद्धि और छात्रवृत्ति में देरी को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया। संगठन ने फीस वृद्धि वापस लेने और लंबित छात्रवृत्तियां जारी करने की मांग की।
महिला सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकार
परिसर में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी, सक्रिय आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और सुरक्षित परिवहन सुविधा सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही नियमित छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग भी उठाई गई।
SFI जिला पदाधिकारियों ने कहा कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगा।