शिमला में 2 माह में 42 सड़क हादसे, 19 लोगों की मौत

rakesh nandan

13/03/2026

सड़क सुरक्षा को लेकर जिला स्तरीय बैठक आयोजित

अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान बताया गया कि जिले में जनवरी 2026 में सड़क सुरक्षा माह का आयोजन किया गया था, जिसके अंतर्गत लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही वर्ष 2026 से पिछले तीन वर्षों के सड़क दुर्घटना आंकड़ों का विश्लेषण भी किया जा रहा है ताकि दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों की पहचान कर उन्हें कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।


पिछले वर्ष की तुलना में दुर्घटनाओं में कमी

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में वर्ष 2024 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटनाओं की सबसे अधिक घटनाएं अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आ रही हैं। विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि सड़क दुर्घटनाओं के पीछे मानवीय गलतियां सबसे बड़ा कारण हैं।


दो माह में 42 दुर्घटनाएं, 19 लोगों की मौत

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026 के जनवरी और फरवरी माह में जिले में कुल 42 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 19 लोगों की मृत्यु हुई। इनमें से 11 लोग स्वयं वाहन चला रहे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कई मामलों में चालक की लापरवाही दुर्घटनाओं का कारण बनी। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने इन आंकड़ों को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा के प्रति सभी को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।


वाहन चलाते समय नियमों का पालन जरूरी

उपायुक्त ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—

  • ओवरस्पीड से बचें

  • शराब के नशे में वाहन न चलाएं

  • अनावश्यक ओवरटेकिंग न करें

  • सीट बेल्ट और हेलमेट का उपयोग करें

उन्होंने कहा कि लापरवाही से वाहन चलाना न केवल अपनी बल्कि दूसरों की जिंदगी को भी खतरे में डाल सकता है।


आपदा मित्रों को भी सड़क सुरक्षा में शामिल किया जाएगा

बैठक में उपायुक्त ने आपदा मित्रों को भी सड़क सुरक्षा व्यवस्था में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा मित्रों के मोबाइल नंबर और पते पुलिस और परिवहन विभाग के साथ साझा किए जाएं। इससे सड़क दुर्घटना होने की स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध करवाई जा सकेगी और राहत कार्यों में तेजी आएगी।


सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण भूमिका

बैठक में विश्व देव मोहन चौहान ने कहा कि जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से गठित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक समिति है। भारत में सड़क सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों के तहत प्रत्येक जिले में इस प्रकार की समितियां बनाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि समिति नियमित रूप से दुर्घटना संभावित स्थानों यानी ब्लैक स्पॉट्स की समीक्षा करती है और वहां आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।


ब्लैक स्पॉट्स पर किए जाते हैं सुधार कार्य

सड़क सुरक्षा समिति द्वारा ब्लैक स्पॉट्स पर निम्न सुधारात्मक उपाय किए जाते हैं—

  • स्पीड ब्रेकर का निर्माण

  • चेतावनी संकेतक बोर्ड लगाना

  • सड़क की मरम्मत

  • ट्रैफिक प्रबंधन व्यवस्था

इन उपायों से दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सकता है।


जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं

सड़क सुरक्षा समिति केवल प्रशासनिक उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता में जागरूकता फैलाने का कार्य भी करती है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर अभियान चलाए जाते हैं।

इन अभियानों के माध्यम से लोगों को—

  • हेलमेट पहनने

  • सीट बेल्ट लगाने

  • नशे में वाहन न चलाने

  • ट्रैफिक नियमों का पालन करने

के लिए प्रेरित किया जाता है।


सुरक्षित यातायात के लिए निरंतर प्रयास

बैठक में कहा गया कि जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।


कई अधिकारी रहे उपस्थित

बैठक में एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) पंकज शर्मा, डीएसपी ट्रैफिक चंद्रशेखर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न सुझाव भी प्रस्तुत किए और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की।