जिला शिमला में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अनुपम कश्यप ने की, जिसमें खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और राशन वितरण प्रणाली की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि विभाग द्वारा खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति सही तरीके से की जाती है, लेकिन कई बार उचित भंडारण न होने के कारण खाद्य वस्तुएं खराब हो जाती हैं। उन्होंने डिपो धारकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी खराब खाद्य वस्तु जनता या बच्चों तक न पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्थान पर खाद्य सामग्री खराब पाई जाती है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दी जाए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
उचित मूल्य की दुकानों की व्यवस्था पर जोर
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के तहत जिला के लोगों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों में भी बच्चों के लिए पोषाहार और राशन की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि उचित मूल्य की दुकानों में खाद्य वस्तुओं का भंडारण उचित स्थान पर किया जाए और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण राशन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी उचित मूल्य की दुकान में खराब खाद्य वस्तुओं की बिक्री की शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि डिपो में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति निरंतर बनी रहनी चाहिए ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिले में 627 उचित मूल्य की दुकानें
बैठक में जानकारी दी गई कि जिला शिमला में कुल 627 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से लोगों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
इनमें शामिल हैं:
348 सहकारी सभाओं द्वारा संचालित दुकानें
234 व्यक्तिगत संचालकों द्वारा संचालित दुकानें
2 महिला मंडलों द्वारा संचालित दुकानें
2 ग्राम पंचायतों द्वारा संचालित दुकानें
हिमाचल प्रदेश खाद्य आपूर्ति निगम की 41 दुकानें
तीन महीनों में राशन वितरण का विवरण
बैठक में यह भी बताया गया कि दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री वितरित की गई। इस अवधि में जिले में निम्नलिखित राशन उपलब्ध करवाया गया:
5525 क्विंटल चीनी
32456 क्विंटल चावल
57648 क्विंटल गेहूं आटा
8251 क्विंटल दालें
2260 क्विंटल आयोडाइज्ड नमक
512038 लीटर खाद्य तेल
निरीक्षण और कार्रवाई
खाद्य वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण भी किए गए। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच 1362 निरीक्षण किए गए, जिनमें 5 दुकानों में अनियमितताएं पाई गईं। इन दुकानों से 5910 रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा होटल और ढाबों में घरेलू गैस सिलेंडरों के उपयोग के तीन मामलों में 9000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसी अवधि में 11 उचित मूल्य की दुकानों द्वारा प्राधिकरण का नवीनीकरण न कराने पर उनसे 44,000 रुपये की प्रतिभूति राशि जब्त कर सरकारी कोष में जमा करवाई गई। वहीं थोक गोदामों से बिलों को अस्वीकार करने पर विभाग द्वारा 4,50,625 रुपये की राशि सरकारी कोष में जमा करवाई गई।
खाद्यान्न सैंपल की जांच
इस अवधि के दौरान खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच के लिए 58 सैंपल लिए गए, जिनमें से केवल एक सैंपल की रिपोर्ट असंतोषजनक पाई गई।
नई उचित मूल्य की दुकानों का प्रस्ताव
बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 12 नई उचित मूल्य की दुकानों को खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। साथ ही अन्य क्षेत्रों में नई दुकानें खोलने के लिए प्रस्तावों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की समीक्षा
इसके बाद जिला स्तरीय सतर्कता समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि जिले में इस अधिनियम के तहत 84,636 परिवारों को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें:
72,147 ग्रामीण क्षेत्र के परिवार
12,849 शहरी क्षेत्र के परिवार शामिल हैं।
अब तक जिले में 66,230 परिवारों का चयन किया जा चुका है, जबकि 18,406 परिवारों का चयन किया जाना शेष है।
बैठक में रहे मौजूद
बैठक के दौरान जिला नियंत्रक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नरेंद्र धीमान ने विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस ममता पॉल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।