शिमला नगर निगम की बैठक में पार्षद निलंबन पर राजनीतिक घमासान
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने शिमला नगर निगम की बैठक में भाजपा पार्षद को निलंबित किए जाने की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कांग्रेस और नगर निगम के महापौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह निर्णय पूरी तरह असंवैधानिक और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। कर्ण नंदा ने स्पष्ट रूप से कहा कि महापौर के पास किसी भी निर्वाचित पार्षद को पद से निलंबित या बर्खास्त करने की कोई संवैधानिक अथवा कानूनी शक्ति नहीं है। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।
कानूनी प्रावधानों का हवाला
नंदा ने कहा कि भारत में, विशेषकर हिमाचल प्रदेश में, पार्षद जनता द्वारा सीधे निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। किसी भी पार्षद को हटाने या अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया नगर निगम अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों, राज्य सरकार की वैधानिक कार्रवाई या न्यायालय के आदेश के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महापौर को एकतरफा निर्णय लेकर किसी पार्षद को निलंबित करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। यदि ऐसा किया जाता है तो यह अधिकारों का अतिक्रमण माना जाएगा।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
कर्ण नंदा ने आरोप लगाया कि शिमला के महापौर ने सुनियोजित तरीके से केवल भारतीय जनता पार्टी के एक पार्षद को निशाना बनाया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर पूरे सदन में केवल एक ही पार्षद को क्यों टारगेट किया गया? उनका कहना है कि यह कांग्रेस की राजनीतिक सोच और प्रतिशोध की मानसिकता को दर्शाता है। भाजपा नेता के अनुसार सदन के भीतर विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
विकास कार्यों पर सवाल
नंदा ने कहा कि सकारात्मक विकास कार्यों में असफल कांग्रेस नगर निगम को राजनीतिक मंच बनाकर विपक्ष को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के बुनियादी मुद्दों — जैसे सफाई, जल निकासी, सड़क मरम्मत और शहरी विकास — पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक टकराव को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। यदि सदन की कार्यवाही को राजनीतिक बदले की भावना से संचालित किया जाएगा तो इससे जनता का विश्वास कमजोर होगा।
मामला न्यायालय में विचाराधीन
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और शीघ्र निर्णय आने की संभावना है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि महापौर संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण करेंगे तो उन्हें कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर कानूनी और लोकतांत्रिक दोनों स्तरों पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का दावा
कर्ण नंदा ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों और सदन की गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग बंद किया जाए। उनका कहना है कि यदि ऐसी कार्रवाई जारी रही तो भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच जोरदार तरीके से उठाएगी। उन्होंने इसे केवल एक पार्षद का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।