शिमला नगर निगम बजट पर भाजपा का हमला

rakesh nandan

21/02/2026

shimla में नगर निगम के बजट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा सचिव एवं पार्षद Kamlesh Mehta ने कांग्रेस शासित नगर निगम द्वारा प्रस्तुत ₹688 करोड़ के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कहा कि जब नगर निगम की वास्तविक आय लगभग ₹143 करोड़ बताई जा रही है, तब इतने बड़े बजट का दावा करना जनता को भ्रमित करने जैसा है।


“ऊँची दुकान फीका पकवान” जैसी योजना

कमलेश मेहता ने कहा कि बजट में दर्शाए गए आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते।

उनके अनुसार, आय और व्यय के बीच भारी अंतर यह दर्शाता है कि बजट केवल कागज़ों पर संतुलित दिखाने की कोशिश है। उन्होंने इसे “ऊँची दुकान फीका पकवान” और “ढाक के तीन पात” जैसी स्थिति करार दिया।

उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के बिना इतने बड़े बजट की घोषणा करना केवल आंकड़ों का खेल है।


महापौर की वैधता पर भी उठे सवाल

भाजपा पार्षद ने यह भी कहा कि नगर निगम के महापौर की वैधानिक स्थिति को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि पद की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो ऐसे में प्रस्तुत बजट की वैधता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए वैधानिक स्पष्टता आवश्यक है।


संपत्ति कर और पानी शुल्क बढ़ाने का विरोध

कमलेश मेहता ने आरोप लगाया कि बजट में संपत्ति कर और पानी शुल्क बढ़ाने जैसे निर्णय सीधे आम नागरिकों की जेब पर असर डालेंगे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीति “जनता से वसूली और उसी को विकास बताने” जैसी प्रतीत होती है।

टैक्स बढ़ाकर बजट संतुलित करना कोई उपलब्धि नहीं बल्कि वित्तीय कुप्रबंधन का संकेत है।


विकास परियोजनाओं पर सवाल

बजट में 14 खेल मैदान, 17 पार्किंग और 25 नई सड़कों जैसी परियोजनाओं की घोषणा की गई है।

कमलेश मेहता ने इन घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनके लिए स्पष्ट वित्तीय स्रोत और समयबद्ध कार्ययोजना का उल्लेख नहीं किया गया है।

बिना ठोस आधार के ऐसी घोषणाएँ “हवा महल” साबित हो सकती हैं।


केंद्र से अनुदान पर निर्भरता

उन्होंने कहा कि बजट दस्तावेज़ों में स्वयं उल्लेख है कि नगर निगम को केंद्र सरकार से लगभग ₹57 करोड़ का अनुदान प्राप्त होगा।

इससे यह स्पष्ट होता है कि निगम अपनी आय से विकास कार्य करने में सक्षम नहीं है और बाहरी सहायता पर निर्भर है।

उन्होंने कहा कि यह नगर निगम की वित्तीय स्थिति की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करता है।


विपक्ष की भागीदारी पर सवाल

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पहली बार बजट बिना विपक्ष की पूर्ण भागीदारी के पेश किया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

उन्होंने कहा, “चर्चा से बचना और बजट थोपना यह दर्शाता है कि सरकार खुद अपने आंकड़ों पर भरोसा नहीं कर पा रही।”


निष्कर्ष

नगर निगम शिमला का बजट अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने इसे अव्यावहारिक और जनता पर बोझ डालने वाला बजट बताया है, जबकि नगर निगम प्रशासन इसे विकासोन्मुखी योजना बता रहा है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट में घोषित योजनाएं धरातल पर कितनी उतर पाती हैं और शहरवासियों को कितना लाभ मिलता है