नगर निगम शिमला की मासिक बैठक में मेयर-डिप्टी मेयर के कार्यकाल बढ़ाने के मुद्दे पर हुए हंगामे को लेकर Sandeepani Bhardwaj ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल द्वारा अध्यादेश को स्वीकृति नहीं मिली और उसकी समय सीमा समाप्त हो चुकी है, तब वर्तमान महापौर का पद पर बने रहना पूर्णतः असंवैधानिक है।
रोस्टर और महिला आरक्षण का मुद्दा
भारद्वाज ने कहा कि महापौर का ढाई वर्ष का कार्यकाल 14 नवंबर को समाप्त हो चुका है और रोस्टर के अनुसार यह सीट महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में पद पर बने रहना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन तथा महिला आरक्षण के अधिकारों की अनदेखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर सत्ता से चिपके रहने का प्रयास कर रही है।
न्यायालय में प्रस्तावित सुनवाई
उन्होंने बताया कि 2 मार्च को इस मामले में न्यायालय में सुनवाई प्रस्तावित है, जिससे यह स्पष्ट है कि मामला कानूनी रूप से विचाराधीन है। इसके बावजूद सदन की कार्यवाही शुरू करना अलोकतांत्रिक है।
सदन की गरिमा पर सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सदन गरिमा और शिष्टाचार का मंच होता है, लेकिन भाजपा पार्षदों के प्रति की गई टिप्पणी निंदनीय है। असहमति को दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने मांग की कि तय रोस्टर के अनुसार महिला आरक्षित सीट पर शीघ्र चुनाव करवाए जाएं और नगर निगम की कार्यवाही संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप चलाई जाए।