बिना लेबल खाद्य वस्तुओं पर सख्ती, DC शिमला के निर्देश

rakesh nandan

30/03/2026

शिमला जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त Anupam Kashyap ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बिना लेबल के बाजार में बिकने वाली खाद्य वस्तुओं पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाए।

उपायुक्त यह निर्देश खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की 9वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए दे रहे थे। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में बाजार में कई प्रकार की खाद्य सामग्री बिकती है, जिनकी गुणवत्ता और स्रोत के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं होती। ऐसे में इन उत्पादों की बिक्री पर नियंत्रण बेहद आवश्यक है।

उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि विशेष रूप से उन खाद्य पदार्थों की जांच की जाए जिनमें कृत्रिम रंग, फ्लेवर या रासायनिक तत्वों का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

उपायुक्त ने दूर-दराज के क्षेत्रों में भी सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोहड़ू, चिड़गांव, कुपवी और चौपाल जैसे क्षेत्रों में भी नियमित जांच की जानी चाहिए और वहां जागरूकता शिविर आयोजित कर लोगों को खाद्य सुरक्षा के प्रति सचेत किया जाए।

बैठक में यह जानकारी दी गई कि हाल ही में मशोबरा और घणाहट्टी क्षेत्रों के स्कूलों से मिड-डे मील के सैंपल लिए गए थे। इस पर उपायुक्त ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में बनने वाले भोजन की नियमित जांच अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।

इसके अलावा, उपायुक्त ने स्कूल परिसरों के आसपास संचालित खाद्य विक्रेताओं की भी जांच के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि पिछले निरीक्षणों के दौरान 12 निगरानी नमूने लिए गए और नगर निगम क्षेत्र में लगभग 30 निरीक्षण किए गए हैं। साथ ही, करीब 600 स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण भी दिया गया है।

उन्होंने होटल और अन्य भोजन प्रतिष्ठानों की नियमित जांच के निर्देश भी दिए। विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष से अब तक जिले में 67 प्रवर्तन नमूने और 88 निगरानी नमूने लिए गए हैं, जबकि नगर निगम क्षेत्र में 80 प्रवर्तन और 85 निगरानी नमूने एकत्रित किए गए हैं।

उपायुक्त ने यह भी कहा कि शादियों और बड़े आयोजनों में बनने वाले भोजन के सैंपल भी अनिवार्य रूप से लिए जाएं, क्योंकि इन आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग भोजन करते हैं और किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

बैठक में यह भी बताया गया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में 15 मामलों का निपटारा किया गया है, जबकि कई मामले न्यायालय में लंबित हैं। इसके अतिरिक्त, नगर निगम क्षेत्र में 57 सुधार नोटिस जारी किए गए, जिनमें से 56 का अनुपालन भी सुनिश्चित किया गया है।

खाद्य व्यवसायों के लाइसेंस और पंजीकरण की स्थिति पर भी चर्चा हुई। नगर निगम क्षेत्र में 280 लाइसेंस जारी किए गए हैं, जबकि पूरे जिले में 238 लाइसेंस और 1849 पंजीकरण जारी किए गए हैं।

उपायुक्त ने मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए, ताकि मौके पर ही खाद्य पदार्थों की जांच की जा सके और लोगों को जागरूक किया जा सके।

कुल मिलाकर, शिमला प्रशासन द्वारा उठाए गए ये कदम खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने और लोगों, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। आने वाले समय में इन सख्त निर्देशों से बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।