शिमला जिला प्रशासन ने आपदा न्यूनीकरण को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विभिन्न परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की है। उपायुक्त Anupam Kashyap की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य आपदा न्यूनीकरण योजना के तहत लगभग 20.70 करोड़ रुपये के चार प्रस्तावों को राज्य स्तर पर भेजने को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में जिन चार प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा हुई, वे जिले के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित हैं, जहां प्राकृतिक आपदाओं का खतरा अधिक रहता है। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य संभावित नुकसान को कम करना और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा को मजबूत करना है।
पहला प्रस्ताव करीब 1.86 करोड़ रुपये का है, जो सुरु गांव में बाढ़ से बचाव के उपायों से जुड़ा है। इस योजना के तहत गांव में बेहतर जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि बरसात के दौरान होने वाले जलभराव और बाढ़ के खतरे को कम किया जा सके। प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना से गांव को संभावित नुकसान से बचाया जा सकेगा।
दूसरा बड़ा प्रस्ताव 9.33 करोड़ रुपये का है, जो रामचंद्र चौक से हेनॉल्ट पब्लिक स्कूल (फेज-2) के बीच सड़कों के आसपास धंसते क्षेत्रों के स्थिरीकरण से संबंधित है। इस क्षेत्र में जमीन धंसने की समस्या लगातार बढ़ रही है, जिससे सड़क और आसपास की संरचनाओं को खतरा बना हुआ है। इस परियोजना के तहत सुदृढ़ीकरण और न्यूनीकरण के उपाय किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जा सके।
तीसरा प्रस्ताव 9.05 करोड़ रुपये का है, जो सुन्नी क्षेत्र में शिमला-मंडी मार्ग की सुरक्षा और मजबूती से जुड़ा है। यह मार्ग एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है और यहां किसी भी प्रकार की क्षति से यातायात प्रभावित हो सकता है। इस योजना के तहत सड़क को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के उपाय किए जाएंगे।
चौथा प्रस्ताव 43.94 लाख रुपये का है, जो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुफरी के भवन की रेट्रोफिटिंग से संबंधित है। इस योजना का उद्देश्य भवन को भूकंप और अन्य आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित बनाना है, ताकि विद्यार्थियों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी प्रस्तावों में यदि कोई कमी रह गई है, तो उसे एक सप्ताह के भीतर दूर किया जाए और पुनः बैठक आयोजित कर अंतिम रूप दिया जाए। इसके बाद इन प्रस्तावों को हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा जाएगा।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पहले भेजे गए छह प्रस्तावों में से चार को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से 10.63 करोड़ रुपये के दो प्रस्तावों को अनुशंसा प्राप्त हुई है, जबकि 2.98 करोड़ रुपये के दो प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। वहीं, 16.72 करोड़ रुपये के दो प्रस्तावों को सुधार के लिए वापस भेजा गया है।

इससे स्पष्ट होता है कि जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर है और लगातार प्रयास कर रहा है कि जोखिम वाले क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं।
बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से संबंधित सुझाव प्रस्तुत किए और योजनाओं को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
कुल मिलाकर, शिमला में प्रस्तावित ये परियोजनाएं न केवल आपदा जोखिम को कम करेंगी, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को भी बढ़ावा देंगी। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।