हिमाचल प्रदेश के शिमला में राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त अनुपम कश्यप ने की, जिसमें जिले में आपदा जोखिम को कम करने के लिए कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
🔹 118 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी
बैठक में कुल लगभग 118 करोड़ रुपये के 5 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। ये प्रस्ताव विभिन्न क्षेत्रों में आपदा से प्रभावित स्थानों के सुधार और भविष्य में जोखिम कम करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
🔹 प्रमुख परियोजनाएं
मंजूर किए गए प्रस्तावों में शामिल प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
- रामपुर के वार्ड नंबर-1 के कल्याणपुर नाले के चैनलाइजेशन के लिए 3.21 करोड़ रुपये
- सुन्नी-शिमला मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए 9.05 करोड़ रुपये
- सैंज-चौपाल क्षेत्र में भूस्खलन प्रभावित सड़क के जीर्णोद्धार के लिए 10.42 करोड़ रुपये
- खागना (चौपाल) सड़क के भूस्खलन प्रभावित हिस्से के लिए 4.90 करोड़ रुपये
- शिमला शहर में विभिन्न आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए 90 करोड़ रुपये की परियोजनाएं
🔹 राज्य स्तर पर भेजे जाएंगे प्रस्ताव
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि इन सभी प्रस्तावों को राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड से अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और भविष्य में जोखिम को कम करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।
🔹 आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की पहल
उपायुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना हुआ है, वहां दीर्घकालिक समाधान के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करना है, बल्कि भविष्य में संभावित नुकसान को भी कम करना है।
🔹 क्या है राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड?
राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड का उद्देश्य प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं के प्रभाव को कम करना और पूर्व तैयारी को मजबूत बनाना है।
इस फंड के माध्यम से:
- बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, आग और बादल फटने जैसी आपदाओं से बचाव
- नदियों के किनारे तटबंध निर्माण
- जल निकासी व्यवस्था में सुधार
- सुरक्षित भवन निर्माण
जैसे कार्य किए जाते हैं।
🔹 जागरूकता और प्रशिक्षण पर भी जोर
इस फंड के तहत केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
- स्कूलों और पंचायतों में मॉक ड्रिल
- आपदा के समय सही निर्णय लेने का प्रशिक्षण
- अर्ली वार्निंग सिस्टम के माध्यम से चेतावनी
जैसी गतिविधियां भी चलाई जाती हैं।
🔹 जिला स्तर पर संचालन
इस फंड का संचालन जिला प्रशासन द्वारा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के माध्यम से किया जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
🔹 बैठक में मौजूद अधिकारी
इस बैठक में एडीएम प्रोटोकॉल ज्योति राणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और विभिन्न परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।