हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में भारतनेट परियोजना के तहत महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय टेलीकॉम समिति की बैठक में यह जानकारी दी गई कि अब तक जिले की 19 ग्राम पंचायतों को भारतनेट परियोजना के माध्यम से जोड़ा जा चुका है।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने बताया कि शेष पंचायतों को भी इस परियोजना से जोड़ने का कार्य तेजी से जारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन ग्राम पंचायतों के अपने भवन नहीं हैं और वे किसी अन्य भवन में संचालित हो रही हैं, उन्हें संबंधित खंड विकास अधिकारी द्वारा अनुमति पत्र जारी किए जाएं। इस संबंध में आवश्यक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज क्षेत्र डोडरा क्वार की ग्राम पंचायतों को भारतनेट परियोजना से जोड़ने पर जोर दिया। यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से यहां के लोगों को भी बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
बैठक में उपायुक्त ने मोबाइल टावरों के नियमितीकरण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में स्थापित सभी अनियमित मोबाइल टावरों का रिकॉर्ड संबंधित कंपनियां तैयार करें और उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू करें। टेलीकॉम नीति के अनुसार मोबाइल टावरों का नियमितीकरण अनिवार्य है, जिससे नेटवर्क सेवाएं बेहतर और सुरक्षित बन सकें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इस विषय पर अब त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि कार्यों की प्रगति की नियमित निगरानी हो सके। बैठक में एडीसी सचिन शर्मा, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर पंकज शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
भारतनेट परियोजना का महत्व
भारतनेट परियोजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी और परिवर्तनकारी पहल है, जिसे डिजिटल इंडिया अभियान की रीढ़ माना जाता है। इस परियोजना का उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है, ताकि गांवों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा सके।
इस योजना के तहत देश की लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों और अंततः 6.45 लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना न केवल तकनीकी विकास का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-गवर्नेंस और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का माध्यम भी है।
भारतनेट परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम 100 एमबीपीएस बैंडविड्थ उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसे तीन चरणों में लागू किया जा रहा है—
- पहले चरण में भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से पंचायतों को जोड़ा जा रहा है।
- दूसरे चरण में फाइबर, रेडियो और सैटेलाइट तकनीकों का मिश्रण उपयोग किया जा रहा है, खासकर दुर्गम क्षेत्रों के लिए।
- तीसरे चरण में नेटवर्क को उन्नत कर फाइबर टू द होम (FTTH) कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे।
इस परियोजना के कार्यान्वयन में बीएसएनएल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है। कई राज्यों ने इस योजना को सफलतापूर्वक लागू कर डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मिसाल पेश की है।
ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम
भारतनेट परियोजना के माध्यम से शिमला जिले की पंचायतों को जोड़ना ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
अंत में कहा जा सकता है कि भारतनेट परियोजना न केवल डिजिटल अंतर को कम कर रही है, बल्कि ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। शिमला जिले में इसकी प्रगति आने वाले समय में विकास की नई संभावनाएं खोलने वाली है।
