स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) शिमला जिला कमेटी द्वारा 18 फरवरी 2026 को चितकारा पार्क, कैथू में यूजीसी रेगुलेशन 2026 के समर्थन में एक विस्तृत सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का उद्देश्य उच्च शिक्षा में समानता, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था तथा छात्र-शिक्षक अधिकारों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विमर्श करना था।
कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से विद्यार्थी, शोधार्थी, अधिवक्ता और शिक्षाविद बड़ी संख्या में शामिल हुए। मुख्य वक्ता के रूप में SFI हिमाचल प्रदेश राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विश्वभूषण उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि हाल ही में लाए गए यूजीसी नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जो रोहित वेमुला प्रकरण के बाद संस्थागत भेदभाव के खिलाफ लंबे संघर्ष का परिणाम हैं। सेमिनार में रोहित एक्ट लागू करने की मांग दोहराई गई, ताकि विश्वविद्यालय परिसरों को जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, जन्मस्थान या विकलांगता के आधार पर भेदभाव से मुक्त बनाया जा सके।
अधिवक्ता विश्वभूषण ने उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि समान अवसर प्रकोष्ठ (EOC) और SC/ST प्रकोष्ठों की स्वायत्तता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन प्रकोष्ठों में न्यायपालिका के निष्पक्ष प्रतिनिधियों तथा सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।
राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए छात्र समुदाय को संगठित रहना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि SFI यूजीसी रेगुलेशन को पहला कदम मानते हुए रोहित एक्ट के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा।
SFI की प्रमुख मांगें:
विश्वविद्यालय प्रशासन से स्वतंत्र, SC/ST/OBC बहुमत प्रतिनिधित्व वाली वैधानिक समिति का गठन।
सामाजिक बहिष्कार, अलगाव और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे अपराधों पर स्पष्ट प्रावधान।
दोषियों के खिलाफ IPC के तहत सख्त आपराधिक कार्रवाई।
देशपांडे समिति की सिफारिश अनुसार साक्ष्य का भार संस्थानों पर स्थानांतरित करना।
स्वतः जांच शक्तियों वाला राष्ट्रीय निगरानी आयोग का गठन।
SFI ने स्पष्ट किया कि समानता केवल दिशा-निर्देश नहीं, बल्कि प्रत्येक छात्र का गारंटीड अधिकार होना चाहिए और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।