SFI का एक्ट की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन

rakesh nandan

06/02/2026

उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले हालिया UGC नियम 2026 को लागू करने तथा प्रस्तावित बिल का शीर्षक शोध छात्र रोहित वेमुला के नाम पर रखने की मांग को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। SFI ने कहा कि छात्रों और सामाजिक रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों के वर्षों के संघर्ष के बाद यह नियम सामने आए हैं। संगठन का कहना है कि रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या के बाद विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए UGC द्वारा न्यायिक याचिकाओं के जवाब में इन नियमों का मसौदा तैयार किया गया।

SFI राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि All India Survey on Higher Education और UGC के आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि संकाय में अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व 14 प्रतिशत से घटकर मात्र 6 प्रतिशत रह गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि समान अवसर प्रकोष्ठ (EOC) और SC/ST प्रकोष्ठों की स्वायत्तता की कमी के कारण शिकायतों का निष्पक्ष समाधान नहीं हो पा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासनों पर अत्यधिक नियंत्रण के चलते इन प्रकोष्ठों की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। SFI ने मांग की कि इन प्रकोष्ठों का गठन लोकतांत्रिक तरीके से किया जाए तथा इनमें SC, ST, OBC, PwD, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

SFI ने यह भी मांग की कि इन प्रकोष्ठों की अध्यक्षता केवल कुलपतियों तक सीमित न रहे, बल्कि न्यायपालिका के निष्पक्ष प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया जाए, ताकि उठाई गई शिकायतों पर विशेषज्ञ निगरानी सुनिश्चित हो सके। संगठन ने कहा कि रेगुलेशन के शीर्षक में रोहित वेमुला का नाम शामिल किया जाना चाहिए, जिससे इसके ऐतिहासिक संदर्भ को मान्यता मिल सके।

SFI ने स्पष्ट किया कि वह इन नियमों को केवल पहला कदम मानता है और रोहित एक्ट की मांग को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। संगठन की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय प्रशासन से स्वतंत्र बाहरी वैधानिक समिति का गठन, जाति आधारित अत्याचारों के लिए स्पष्ट आपराधिक प्रावधान, दोषियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई, देशपांडे समिति की सिफारिशों को लागू करना तथा UGC से परे स्वतः जांच शक्तियों वाले राष्ट्रीय निगरानी आयोग का गठन शामिल है। SFI शिमला जिला अध्यक्ष विवेक नेहरा ने कहा कि दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों को विश्वविद्यालयों में लगातार भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पीड़ितों की शिकायतें या तो लंबित रखी जाती हैं या फिर दोषियों के पक्ष में निपटा दी जाती हैं।

उन्होंने कहा कि SFI समानता के संवैधानिक मूल्यों और गरिमा के साथ जीने के अधिकार की रक्षा के लिए हर कैंपस में इन नियमों के क्रियान्वयन पर कड़ी नजर रखेगा और रोहित एक्ट की मांग को और मजबूती देगा। इस अवसर पर सनी सेकटा (राज्य सचिव, SFI) ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।