Students Federation of India (SFI-HP) ने Shoolini University के एमबीए चौथे सेमेस्टर के छात्र नितिन चौहान की मौत पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। संगठन ने इस घटना को “संस्थागत विफलता” का परिणाम बताते हुए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग उठाई है।
रोहड़ू निवासी नितिन चौहान की 28 मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। SFI के अनुसार यह घटना उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ती संस्थागत उदासीनता और छात्रों के शोषण की ओर संकेत करती है। संगठन ने आरोप लगाया कि नितिन को इंटर्नशिप और प्लेसमेंट प्रक्रिया के दौरान अनुचित परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
SFI के मुताबिक, दूसरे सेमेस्टर की इंटर्नशिप के दौरान नितिन से ऐसे कार्य करवाए गए जो उनके शैक्षणिक प्रशिक्षण से संबंधित नहीं थे। इनमें फर्श साफ करवाना, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए घंटियां बजवाना और सामान उठवाना जैसे कार्य शामिल बताए गए हैं।
इसके बाद चौथे सेमेस्टर के दौरान प्लेसमेंट प्रक्रिया में उन्हें ₹40,000 मासिक वेतन का आश्वासन दिया गया, जिसे बाद में घटाकर ₹25,000 कर दिया गया। संगठन का दावा है कि यह राशि उनके मासिक खर्च (लगभग ₹35,000) से भी कम थी। जब उन्होंने इस पर सवाल उठाया, तो उन्हें प्लेसमेंट सेल के पास भेजा गया, लेकिन वहां से उन्हें कोई ठोस सहायता नहीं मिली।
SFI ने आरोप लगाया कि बाद में उन्हें नोएडा की एक कंपनी में भेजा गया, जहां कार्य की शर्तें भी शोषणकारी थीं। इसमें टारगेट पूरा न करने पर वेतन कटौती और नौकरी से हटाने जैसी शर्तें शामिल थीं। कुछ समय बाद उन्हें वहां से भी हटा दिया गया।
संगठन का कहना है कि इन परिस्थितियों के बावजूद न तो विश्वविद्यालय प्रशासन, न प्लेसमेंट सेल और न ही शिक्षकों ने उनकी मदद की। उल्टा, उनसे उस अवधि का हॉस्टल शुल्क भी मांगा जाता रहा, जब वे वहां रह नहीं रहे थे।
इन सब घटनाओं के बीच बढ़ते मानसिक दबाव के चलते नितिन ने आत्महत्या का प्रयास किया। SFI का कहना है कि यह केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही और जवाबदेही के अभाव का परिणाम है।
संगठन ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा किए जाने वाले “100% प्लेसमेंट” और “Mission 130” जैसे दावे इस घटना के बाद सवालों के घेरे में हैं। SFI के अनुसार ये दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते और छात्रों को भ्रामक तस्वीर पेश करते हैं।
SFI-हिमाचल प्रदेश ने इस घटना के संदर्भ में कई मांगें रखी हैं। इनमें नितिन चौहान की मृत्यु की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच, संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और जहां भी लापरवाही या दबाव साबित हो, वहां आपराधिक जिम्मेदारी तय करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा संगठन ने राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में प्लेसमेंट प्रक्रियाओं की समीक्षा और सख्त नियमन लागू करने की मांग की है। साथ ही छात्रों के लिए मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
SFI का कहना है कि जब तक संस्थागत जवाबदेही तय नहीं की जाती और संवेदनशील तंत्र विकसित नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की घटनाओं को रोका नहीं जा सकता।
यह मामला प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, प्लेसमेंट प्रणाली और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों पर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और संबंधित संस्थान इस पर क्या कदम उठाते हैं।